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Baital Chhabbisi-Paper Back

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9788126703241
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गुजराती के सुविख्यात व्यंग्य लेखक विनोद भट्ट की यह कृति अपने पृष्ठों में सैकड़ों ऐसी बेजोड़ व्यंग्य कथाएँ सँजोए हुए हैं, जो मनोरंजक तो है ही, हमारी परम्परागत संस्कारशीलता का परिष्कार भी करती हैं। ये अनायास ही हमें वहाँ तक ले जाती हैं, जहाँ स्थितियाँ, इतिहास और चरित्र नए अर्थ देने लगते हैं। विनोद वस्तुतः पौराणिक और ऐतिहासिक मिथकों के सहारे समकालीन समाज की बहुविध विसंगतियों और मानव-स्वभाव की क्षुद्रताओं पर तीखे कटाक्ष करते हैं। कम-से-कम शब्दों में बड़ी-से-बड़ी बात कहना उनकी ख़ास पहचान बन चुकी है।

यह व्यंग्य-संग्रह कई उप शीर्षकों में बँटा हुआ है, जिनमें संगृहीत कथाएँ एक ख़ास अन्दाज़ में एक ख़ास विषय को उठाती हैं। इसके लिए परम्परागत भारतीय लोक-कथाओं, जातक-कथाओं, पच्चीसी, बत्तीसी तथा मेघदूत की शैली का उपयोग किया गया है। इससे कथाओं की पठनीयता और सहज ग्राह्यता में बढ़ोतरी हुई है, यहाँ तक कि ये आसानी से हमारी स्मृति का हिस्सा बन जाती हैं और इनकी प्रभावशीलता हमें दूसरों को सुनाने की उत्तेजना से

भर देती है।

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Isbn 10 8126703245
Publication Year 1987
Edition Year 1996, Ed. 4th
Pages 179p
Price ₹35.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 17.5 X 10.5 X 1
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Vinod Bhatt

Author: Vinod Bhatt

विनोद भट्ट

जन्म : 14 जनवरी, 1938; अहमदाबाद (गुजरात)।

शिक्षा : बी.ए., एल.एल.बी.। जीविका के लिए वकालत और लेखन।

गुजरात के विशिष्ट व्यंग्यकार-रचनाकार। लेखन का आरम्भ 1955 से। तब से लघुकथा, निबन्ध, पत्र, संवाद आदि विभिन्न साहित्य-समारोहों, गोष्ठियों और कवि सम्मेलनों में बतौर संचालक एक अपरिहार्य व्यक्तित्व। पहली बहुचर्चित पुस्तक ‘विनोद नी नजरे’ (विनोद की दृष्टि में)। इसके बाद कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन। कुछ रचनाओं का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद। कई पुस्तकें विभिन्न पुरस्कारों से पुरस्कृत-सम्मानित। कुछ पाठ्यक्रमों में भी सम्मिलित।

प्रमुख रचनाएँ : ‘विनोद नी नजरे’, ‘अने हने इतिहास’, ‘इदम् चतुर्थम्’, ‘नरो वा कुंजरो वा’, ‘आँख आडा कान’, ‘ग्रन्थ नी गरबड़’, ‘मंटो : एक बदनाम लेखक’ आदि।

निधन : 23 मई, 2018

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