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Baandi-Hard Cover

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प्रस्तुत उपन्यास ह्रासशील सामन्तवाद को उसके सम्पूर्ण घिनौने पहलुओं के साथ, बड़ी बारीकी से हमारे समक्ष पेश करता है। इस ह्रासशील सामन्तवाद को उसकी सारी सड़ांध के साथ हम बड़े सरकार के चरित्र, उनके क्रियाकलापों, जो उनके अन्तःपुर से लेकर बाहर के परिवेश तक फैले हुए हैं, सामन्ती साम्राजी साँठ-गाँठ और उसके शिकार साधारण जनों की ज़िन्दगी तथा नरक की इस ज़िन्दगी से मुक्त होने की उनकी कोशिशों तथा मुक्त न हो पाने की स्थिति में उनकी छटपटाहट, प्रतिहिंसा आदि में देखते हैं।

भैरव जी ने इस सारे परिदृश्य को यथार्थ के सही आलोक में बारीकी के साथ देखा और चित्रित किया है।

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Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2018
Edition Year 2018, Ed. 1st
Pages 255p
Price ₹450.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 15 X 2
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Bhairavprasad Gupt

Author: Bhairavprasad Gupt

भैरवप्रसाद गुप्त

जन्म : 7 जुलाई, 1918 को गाँव— सिवानकला, बलिया, उ.प्र.।

शिक्षा : इविंग कॉलेज, इलाहाबाद से स्नातक।

अपने शिक्षक की प्रेरणा से कहानी-लेखन की ओर रुझान हुआ। जगदीशचन्द्र माथुर, शिवदानसिंह चौहान जैसे लेखकों एवं आलोचकों के सम्पर्क और साहित्यक-राजनीतिक परिवेश में उनके रचनात्मक संस्कारों को दिशा मिली।

सन् 1940 में मज़दूर नेताओं से सम्पर्क। सन् 1944 में माया प्रेस, इलाहाबाद से जुड़े। अपने अन्य समकालीनों की तरह आर्य समाज और गाँधीवादी राजनीति की राह से वामपंथी राजनीति की ओर आए। सन् 1948 में वे कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बने।

प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें : उपन्यास—‘शोले’, ‘मशाल’, ‘गंगा मैया’, ‘ज़ंजीरें और नया आदमी’, ‘सत्ती मैया का चौरा’, ‘धरती’, ‘आशा’, ‘कालिन्दी’, ‘रम्भा’, ‘अन्तिम अध्याय’, ‘नौजवान’, ‘एक जीनियस की प्रेमकथा’, ‘भाग्य देवता’, ‘अक्षरों के आगे’ (मास्टर जी), 'छोटी-सी शुरुआत’; कहानी-संग्रह—‘मुहब्बत्त की राहें’, ‘फ़रिश्ता’, ‘बिगडे हुए दिमाग़’, ‘इंसान’, ‘बलिदान की कहानियाँ’, ‘मंज़‍िल’, ‘महफ़‍िल’, ‘सपने का अन्‍त’, ‘आँखों का सवाल’, ‘मंगली की टिकुली’, ‘आप क्या कर रहे हैं?’; नाटक और एकांकी—‘कसौटी’, ‘चंदबरदाई’, ‘राजा का बाण’। सम्पादित पत्रिकाएँ—‘माया’, ‘मनोहर कहानियाँ’, ‘कहानी’, ‘नई कहानियाँ’ आदि ।

निधन : 5 अप्रैल, 1995

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