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60 Ke Bad Ki Kahaniyan-Hard Back

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सन् 1965 के सितम्बर महीने में जब यह संकलन पहली बार छपकर आया, तब तक इसमें सम्मिलित 14 कहानीकारों में से किसी का भी कोई कहानी-संग्रह प्रकाशित नहीं हुआ था। सबकी तीन, चार, पाँच कहानियाँ इधर-उधर पत्र-पत्रिकाओं में छपी थीं। इस 'यूथ ब्रिगेड' की संरचना का आइडिया श्री (स्व.) विजयमोहन सिंह के दिमाग़ की उपज था। इसे साकार करने का सारा श्रेय उन्हीं को जाता है! मोटा-मोटी 15 से 20 बिल्कुल नए और लगभग अनछपे कहानीकारों से पत्र-व्यवहार और अनुमति लेकर (और कुछ की अनुमति न मिलने के कारण) उन्होंने हर कहानीकार की दो-दो कहानियों के साथ इस संग्रह की योजना को रूप दिया। आश्चर्यजनक रूप से इन कथाकारों में उन्होंने कुछ ऐसे प्वाइंट्स ढूँढ़ निकाले, जो पूर्ववर्ती कथा-रचना से इन्हें अलग करते थे। वह मुख्य प्वाइंट है—'सम्बन्धों से मोहभंग'। माँ-बाप, भाई-बहन, प्रकृति और मनुष्य-जीवन की आत्मीयता का परिचय और परम्परित संसार इन कहानीकारों की कथा-रचनाओं से लगभग ग़ायब दिखता है। इस संकलन के सभी कथाकारों के वास्तविक जीवन में सबकी माँएँ हैं, पिता हैं, भाई-बहनें हैं, पड़ोस है, सम्पूर्ण जीवन का एक भरा-पूरा संसार है, लेकिन कहानियों में आए पात्रों के जीवन और व्यवहार से उनका रिश्ता एक दार्शनिक खिन्नता का है। प्रेमल रोमांस जैसे ग़ायब है और जीवन की विचित्र-सी हबड़-दबड में एक नीरस-निरर्थक अवाजाही है। क्या यह एक दार्शनिक उपक्रम है जो सामाजिक-पारवारिक-राजनीतिक विच्छिन्‍नता से उत्पन्न हुआ है या एक विराग और अवसाद की स्थिति है जो आज़ादी के बाद पैदा हुई है? जीवन विराटता का एक समूहीकरण नहीं, बल्कि एक विचित्र-सा बिखराव का संकेत देता है। चुनौतियों का अभाव है और विरासत में मिली और आगे आनेवाली एक घिसट का संकेत है। आज़ादी के बाद उसकी विचित्र क़‍िस्म की निरर्थकता ही इन कथाकारों को एक नई दुनिया में ला खड़ा करती है। वह दुनिया आज भी जस-की-तस है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Publication Year 2017
Edition Year 2017, Ed. 1st
Pages 287p
Price ₹695.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
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Abrar Multani

Author: Abrar Multani

डॉ. अबरार मुल्तानी आप एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ होने के साथ-साथ स्वास्थ्य लेखन में पिछले कई वर्षों से अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। अभी तक हज़ारों जटिल एवं जीर्ण रोगियों के उपचार का अनुभव आपको प्राप्त है। प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को नवीन रूप में प्रस्तुत कर लोगों में आयुर्वेद के प्रति फैली भ्रान्तियों को मिटाने में, आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार करने में आप एक अग्रणी नाम हैं। बॉडी, माइंड एंड सोल (शरीर, मन और आत्मा) का अद्भुत सम्मिश्रण कर चिकित्सा करने में महारत है। आप हिजामा थेरैपी को भारत में प्रचलित करने में अग्रज हैं। आप ‘इंक्रेडिबल आयुर्वेदा’ के संस्थापक हैं तथा ‘स्माइलिंग हार्ट्स’ नामक संस्था के प्रेसिडेंट हैं। आप देश के पहले आनन्द मंत्रालय की गवर्निंग कमेटी के सदस्य भी हैं। ‘बीमार होना भूल जाइए’ और ‘सोचिए और स्वस्थ रहिए’ आपकी बेस्टसेलर पुस्तकें हैं। आयुर्वेद चिकित्सकों के लिए लिखी आपकी पुस्तकें भी उस श्रेणी की बेस्टसेलर हैं। आप प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में स्तम्‍भकार भी हैं और कई अन्य प्रसिद्ध पुस्तकों के लेखक भी हैं–‘मोटापे से ब्रेकअप’, ‘प्रेग्नेंसी एंड चाइल्ड केयर गाइड’, ‘बीमारियाँ हारेंगी’, ‘जीना सिखा देंगी’, ‘एक वाक्य से ज़िन्दगी बदल सकती है’, ‘ ज़िन्दगी बदल देंगी’, ‘प्रदूषित काया का शुद्धिकरण’, ‘10 कमांडमेंट्स ऑफ़ पीस’, 'Forget to be ill', 'Al-Hijama', 'Practical Prescriber for Ayurveda Physicians', '200 Golden Health Tips by Prophet Muhammed S.A.W.', '100 Nectar on Earth For You', 'Lets Wipe My Country's Tears', 'Problems Inside the Bedroom and their Solution'.

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