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Ziladhikari-Hard Cover

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9788171197194
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ज़िला प्रशासन में ज़िलाधिकारी की भूमिका सबसे अहम होती है। ज़िलाधिकारी ही ज़िले में शासन का सबसे उत्तरदायी प्रतिनिधि होता है। उसका काम होता है कि वह सरकार की नीतियों और परिकल्पनाओं को काग़ज़ से निकलकर यथार्थ रूप में कार्यान्वित करे। साथ ही उसे जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं से भी सीधे जुड़ना होता है। इस प्रकार हम देखते है कि आज के ज़िलाधिकारी की ज़िम्मेदारियाँ पूर्व के ज़िलाधिकारी के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा चुनौतीपूर्ण और बहुआयामी होती हैं।

यह पुस्तक ज़िलाधिकारी की इन्हीं ज़िम्मेदारियों का बहुत विश्वसनीय और सघन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। ज़िला प्रशासन और ज़िला प्रमुख के विषय पर अभी तक उपलब्ध सूचनात्मक किताबों से यह पुस्तक इसलिए अलग है कि इसमें लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर उन परिस्थितियों का व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत किया है जो किसी भी ज़िलाधिकारी के सामने कभी भी आ सकती हैं। श्री आलोक रंजन उत्तर प्रदेश के पाँच जनपदों—इलाहाबाद, आगरा, ग़ाज़ियाबाद, बाँदा और ग़ाज़ीपुर में बतौर ज़िलाधिकारी कार्य कर चुके हैं। इस दौरान उन्हें जो अनुभव हुए, उन्हीं के आधार पर उन्होंने इस पुस्तक की रचना की है। ज़ाहिर है कि उनके ये अनुभव ज़िला प्रशासन के सभी पक्षों पर प्रकाश डालते हैं। लेखक ने प्रकरण अध्ययन (केस स्टडी) प्रविधि के द्वारा ज़िला प्रशासन की चुनौतियों को बहुत सरल और सुगम तरीक़े से प्रस्तुत किया है।

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Edition Year 2011
Pages 176p
Price ₹250.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Alok Ranjan

Author: Alok Ranjan

आलोक रंजन

आलोक रंजन (जन्म : 9 मार्च, 1956) सेवानिवृत्त आईएएस हैं। उन्होंने 38 वर्षों तक प्रशासन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट सेवाएँ दीं। वे उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव पद से 2016 में सेवानिवृत्त हुए।
शिक्षा, आर्थिक विषयों, वित्त, कृ​षि, औद्योगिक प्रशासन, सार्वजनिक नीति तथा उद्योग आदि क्षेत्रों में उन्हें व्यापक प्रबन्धन और प्रशासनिक अनुभव रहा है।
सेवानिवृत्ति के बाद वे मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्य सलाहकार और यूपीएसआईडीसी के अध्यक्ष रहे और राज्य के विकास कार्यों की निगरानी की।
प्रबन्धन, नेतृत्व, प्रशासन आदि विषयों पर वैचारिक पकड़ पथप्रवर्तक रही है। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी हैं और टाइम्स ऑफ इंडिया, इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड व हिन्दुस्तान टाइम्स आदि समाचार पत्रों में लिखते रहे हैं।

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