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Yoon Guzari Hai Ab Talak-Paper Back

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हिन्दी सिनेमा की सुपरिचित निर्माता, निर्देशक और लेखक सीमा कपूर की आत्मकथा ‘यूँ गुज़री है अब‍ तलक’ सिर्फ़ उनके ही जीवन की कहानी नहीं है, इसमें हम एक पूरे दौर के जाने-माने कलाकारों, ‌फ़ि‍ल्मकारों के साथ-साथ उनके परिवार के बारे में भी जान पाते हैं।

उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि पारसी थियेटर के ज़माने की कला से जुड़ी रही है। पिता मदनलाल  कपूर का पारसी रंगमंच को जो योगदान रहा, उसे अब भी याद किया जाता है। माँ कमल कपूर ‘शबनम’ शायर थीं। बड़े भाई रंजीत कपूर रंगमंच के और अन्नू कपूर हिन्दी सिने-जगत के जाने-माने चेहरे हैं। छोटे भाई निखिल कपूर कवि हैं।

सीमा जी प्रसिद्ध अभिनेता ओम पुरी की जीवन-संगिनी हैं, तो ज़ाहिर है इस आत्मकथा में उनका जीवन भी हमारे सामने आता है, वे संघर्ष भी दिखाई देते हैं जिनसे आप दोनों को गुज़रना पड़ा और ख़ुशियों के वे पल भी जो उन्होंने जिये। ओम पुरी के जीवन के अन्तिम दिनों की उदास करनेवाली छवियाँ हमें सिर्फ़ इसी पुस्तक में मिलती हैं। कलाकार-दम्पती ने उन दिनों को जैसे जिया, वह पठनीय तो है ही अनुकरणीय भी है।

कहने की आवश्यकता नहीं कि हिन्दी सिने-जगत की बड़ी दुनिया के कई अहम पहलू भी इसमें पाठकों को देखने-जानने को मिलेंगे।

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 432p
Price ₹599.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2.5
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Seema Kapoor

Author: Seema Kapoor

सीमा कपूर

सीमा कपूर का जन्म 12 मई, 1959 को भोपाल, मध्यप्रदेश में हुआ। बचपन पारम्परिक पारसी थियेटर में बीता। उन्होंने अलीगढ़ विश्वविद्यालय से बी.ए. किया। विख्यात नाट्य-निर्देशक हबीब तनवीर, राजेन्द्र नाथ, दादी पद्म जी, अस्ताद देबू और रंजीत कपूर के साथ कई नाटक किये। पपेट थियेटर के ज़रिये कई वर्षों तक विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। फ़िल्म और टेलीविज़न के लिए लेखन, निर्देशन और निर्माण में व्यस्तता।

उनके प्रमुख कार्य हैं—‘हाट द वीकली बाज़ार’ (फ़ीचर फ़िल्म); ‘मिस्टर कबाड़ी’ (हास्य फ़ीचर फ़िल्म); ‘क़िले का रहस्य’, ‘ज़िन्दगीनामा’, ‘पलछिन’, ‘रिश्ते’, ‘विजय ज्योति’, ‘आवाज़ दिल से दिल तक’, ‘एकलव्य’, ‘मेरा गाँव मेरा देश’, ‘अवंतिका’ (धारावाहिक); ‘महानदी के किनारे’, ‘ओरछा : एक अन्तरयात्रा’, ‘नौटंकी एंड पारसी थियेटर : अ जर्नी’ तथा ‘सॉन्ग ऑफ़ द सॉइल’ (डॉक्यूमेंटरी)।

उनकी लिखी बाल फ़ीचर फ़िल्म ‘अभय’ राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हुई। उन्हें ‘बेस्ट क्रिटिक अवार्ड’ (थर्ड आई एशियन फ़ेस्टिवल), ‘बेस्ट स्टोरी स्क्रीन प्ले’ (जागरण इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल) से सम्मानित किया गया।

ई-मेल : [email protected] 

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