Vimukt Janjatiyon Ki Vikas-Yatra : Niti Evam Vyavhar

Author: Malli Gandhi
Translator: Yugank Dhir
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Vimukt Janjatiyon Ki Vikas-Yatra : Niti Evam Vyavhar
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सिद्धपुरम और स्टुअर्टपुरम की बस्तियों के अध्ययन पर आधारित यह पुस्तक आन्ध्र प्रदेश की पूर्व-अपराधी और विमुक्त जनजातियों से सम्बद्ध साहित्य में एक स्वागत योग्य इजाफा है। भारतीय जनजातियों को लेकर प्रामाणिक अध्ययन बहुत कम हुए हैं, आन्ध्र प्रदेश की विमुक्त जनजातियों पर और भी कम। पूर्व-अपराधी जनजातियों पर तो कोई अच्छा काम मिलता ही नहीं है। इन जनजातियों की कुल पाँच बस्ति‍याँ है जिनमें से दो की देखरेख साल्वेशन आर्मी करती है। उन्हीं में से एक का नाम स्टुअर्टपुरम है जो आन्ध्र प्रदेश के वर्तमान जिले गुंटूर के तहत आती है और जिसका नाम मद्रास सरकार के तत्कालीन सचिव मि. स्टुअर्ट के नाम पर पड़ा है।

इस बस्ती से कई नामी-गिरामी डकैतों के आने के चलते कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का ध्यान इसकी तरफ गया और उन्होंने बहुत लगन और समर्पण के भाव से अपना समय और ऊर्जा इस बस्ती के आपराधिक माहौल को बदलने के लिए खर्च किये। इनमें एथीस्ट सेंटर, विजयवाड़ा के लवानम और हेमलता लवानम के नाम प्रमुख हैं। इनके और सरकार के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप आज यहाँ रहनेवालों के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है।

मल्ली गांधी ने राष्ट्रीय तथा तमिलनाडु व आन्ध्र प्रदेश के अभिलेखागारों से कुछ दुर्लभ दस्तावेजों के साथ इस पुस्तक के लिए द्वितीयक स्रोतों के सर्वेक्षणों का भी उपयोग किया है। इसके अलावा जो चीज इस पुस्तक को और महत्त्वपूर्ण बनाती है, वह हैं वे मौखिक साक्ष्य जिन्हें जुटाने में लेखक ने कड़ा परिश्रम किया और जिनके कारण इस पुस्तक को और भी प्रामाणिक रूप मिला।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2023
Edition Year 2023, Ed. 1st
Pages 272p
Translator Yugank Dhir
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2
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Malli Gandhi

Author: Malli Gandhi

मल्ली गांधी

मल्ली गांधी का जन्म 1969 में हुआ। उन्होंने हैदराबाद विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. और एम.फिल की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमैनि‍टीज एंड सोशल साइंसेज रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, मैसूर में बतौर लेक्चरर अध्यापन शुरू किया। उनकी रुचि आधुनिक भारत का इतिहास, सांस्कृतिक इतिहास, सबाल्टर्न इतिहास, शिक्षा का इतिहास आदि विषयों में है। अंग्रेजी और तेलुगु में उनके बीस से ज्यादा आलेख विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। आन्ध्र प्रदेश में जनजातीय शिक्षा से जुड़े एनसीईआरटी की कई महत्त्वपूर्ण शोध परियोजनाओं पर कार्य कर चुके हैं।

उन्होंने अध्यापकों के लिए कई प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कार्यशालाओं का संचालन भी किया है। जनजातीय शिक्षा पर प्रशिक्षण-सामग्री के विकास में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। राज्य एवं केन्द्र सरकारों की विभिन्न संस्थाओं की कार्यशालाओं से भी वे जुड़े रहे हैं। उन्हें ‘इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च फेलोशिप’ (1993-1997) भी मिल चुका है।

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