Facebook Pixel

Tokri Mein Digant-Paper Back

Special Price ₹269.10 Regular Price ₹299.00
10% Off
In stock
SKU
9789390971473
- +
Share:
Codicon

अनामिका के नए संग्रह ‘टोकरी में दिगन्त—थेरी गाथा : 2014’ को पूरा पढ़ जाने के बाद मेरे मन पर जो पहला प्रभाव पड़ा, वो यह कि यह पूरी काव्य-कृति एक लम्बी कविता है, जिसमें अनेक छोटे-छोटे दृश्य, प्रसंग और थेरियों के रूपक में लिपटी हुई हमारे समय की सामान्य स्त्रियाँ आती हैं। संग्रह के नाम में 2014 का जो तिथि-संकेत दिया गया है, मुझे लगता है कि पूरे संग्रह का बलाघात थेरी गाथा के बजाय इस समय-सन्दर्भ पर ही है। संग्रह के शुरू में एक छोटी-सी भूमिका है, जिसे कविताओं के साथ जोड़कर देखना चाहिए। बुद्ध अनेक कविताओं के केन्द्र में हैं, जो बार-बार प्रश्नांकित भी होते हैं और बेशक एक रोशनी के रूप में स्वीकार्य भी। इस नए संकलन में अनेक उद्धरणीय काव्यांश या पंक्तियाँ मिल सकती हैं, जो पाठक के मन में टिकी रह जाती हैं।

बिना किसी तार्किक संयोजन के यह पूरा संग्रह एक ऐसे काव्य-फलक की तरह है, जिसके अन्त को खुला छोड़ दिया गया है। स्वयं इसकी रचयिता के अनुसार “वर्तमान और अतीत, इतिहास और किंवदन्तियाँ, कल्पना और यथार्थ यहाँ साथ-साथ घुमरी परैया-सा नाचते दीख सकते हैं।” आज के स्त्री-लेखन की सुपरिचित धारा से अलग यह एक नई कल्पनात्मक सृष्टि है, जो अपनी पंक्तियों को पाठक पर बलात् थोपने के बजाय उससे बोलती-बतियाती है, और ऐसा करते हुए वह चुपके से अपना आशय भी उसकी स्मृति में दर्ज करा देती है। शायद यह एक नई काव्य-विधा है, जिसकी ओर काव्य-प्रेमियों का ध्यान जाएगा। समकालीन कविता के एक पाठक के रूप में मुझे लगा कि यह काव्य-कृति एक नई काव्य-भाषा की प्रस्तावना है, जो व्यंजना के कई बन्द पड़े दरवाज़ों को खोलती है और यह सब कुछ घटित होता है एक स्थानीय केन्द्र के चारों ओर। कविता की जानी-पहचानी दुनिया में यह सबाल्टर्न भावबोध का हस्तक्षेप है, जो अलक्षित नहीं जाएगा।

—केदारनाथ सिंह

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2021
Edition Year 2025, Ed. 3rd
Pages 183p
Price ₹299.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 19.5 X 13 X 1
Write Your Own Review
You're reviewing:Tokri Mein Digant-Paper Back
Your Rating
Anamika

Author: Anamika

अनामिका

‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से पुरस्कृत कवयित्री अनामिका का जन्म 17 अगस्त, 1961 को मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार में हुआ। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी की प्रोफ़ेसर हैं। उनकी पुरस्कृत और देश-दुनिया की बहुतेरी भाषाओं में अनूदित प्रमुख कृतियाँ हैं—‘बीजाक्षर’, ‘अनुष्टुप’, ‘कविता में औरत’, ‘खुरदुरी हथेलियाँ’, ‘दूब-धान’, ‘टोकरी में दिगन्त’, ‘पानी को सब याद था’, ‘My Typewriter is My Piano’, ‘Vaishali Corridors’ (कविता-संकलन); ‘अवान्तर कथा’, ‘दस द्वारे का पींजरा’, ‘तिनका तिनके पास’, ‘आईनासाज़’ (उपन्यास); ‘स्त्रीत्व का मानचित्र’, ‘स्वाधीनता का स्त्री-पक्ष’, ‘त्रिया चरित्रं : उत्तरकांड’, ‘स्त्री मुक्ति : साझा चूल्हा’, ‘स्त्री-मुक्ति की सामाजिकी : मध्यकाल और नवजागरण’, ‘Feminist Poetics : Where Kingfishers Catch Fire’, ‘Donne Criticism Down the Ages’, ‘Treatment of Love and War in Post-War Women Poets’, ‘Proto-Feminist Hindi-Urdu World (1920-1964)’, ‘Translating Racial Memory’, ‘Hindi Literature Today’ (आलोचना)।

ई-मेल : [email protected]

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top