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Siddharth Aur Gilahari Chayan-Paper Back

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गहरी करुणा, वैचारिक परिपक्वता और संसार को मनुष्यों समेत हर जीव के लिए एक उदार खुली जगह बनाने की मंशा से युक्त के. सच्चिदानन्दन की ये कविताएँ हमें एक बड़े रचनाकार का भावप्रवण सान्निध्य उपलब्ध कराती हैं।

के. सच्चिदानन्दन मलयालम भाषियों के लिए जितने अपने हैं, उतने ही हिन्दी भाषी पाठकों के भी हैं। अनामिका अनु द्वारा संकलित-अनूदित यह संग्रह उनकी कविता-यात्रा का अगला चरण है। वे ऐसे कवि हैं जो न अपने फ़ॉर्म को पुराना पड़ने देते हैं, न ही अपनी दृष्टि को। भीतर और बाहर की अपनी यात्राओं और कला-साहित्य के विभिन्न अनुशासनों से अपने लगाव के चलते वे अपनी कविता को लगातर नई करते रहते हैं। उन्हीं के शब्दों में : ‘मेरी कविता एक संवाद है जो मैं अपने से, दूसरों से, प्रकृति से और सृष्टि से अनवरत करता रहता हूँ। आधी सदी से भी ज़्यादा समय से मैं कविता लिख रहा हूँ, कविता का अनुवाद भी करता रहा हूँ, कविता के बारे में लिखता भी रहा हूँ, फिर भी हर नई कविता के सम्मुख मैं एक ‘बिगिनर’ की तरह ही प्रस्तुत होता हूँ। हर नई कविता में अपने अनुभव को व्यक्त करने के लिए मुझे नए सिरे से सही शब्दों और उपयुक्त शिल्प की तलाश करनी होती है।’

इस संकलन की कविताएँ अपनी कथ्यगत विविधता और संवेदना की व्यापक परिधि के साथ पुन: हमें उनकी कविता के विराट लोक में ले जाती है जहाँ दु:ख के कमरे हैं, और देशों की सीमाएँ उलांघती मानवीयता के विशाल पंख भी।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Vihag Vaibhav
Editor Not Selected
Publication Year 2023
Edition Year 2023, Ed. 1st
Pages 136p
Price ₹199.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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K. Satchidanandan

Author: K. Satchidanandan

के. सच्चिदानन्दन 

जन्म : 28 मई, 1946

के. सच्चिदानन्दन मलयालम के आधुनिक और आधुनिकोत्तर कवियों में अग्रणी हैं। मलयालम में आपकी कविताओं के अलावा अनूदित कविताओं, नाटक, आलोचना और साक्षात्कार के कई संकलन प्रकाशित हैं। अंग्रेज़ी, तमिल, हिन्दी, गुजराती, कन्नड़, बांग्ला, पंजाबी और ओड़िया भाषाओं में अनूदित आपकी कविताओं के कई संकलन भी प्रकाशित हैं। आपकी अंग्रेज़ी रचनाओं का एक संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है।

आपने अंग्रेज़ी और मलयालम की अनेक पुस्तकों का सम्पादन भी किया है।

आपने अनेक अन्तरराष्ट्रीय काव्योत्सवों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है तथा अमेरिका, रूस, लातीविया, स्वीडेन, इटली, युगोस्लाविया, जर्मनी और चीन के अलावा भारत के विभिन्न भागों में आलेख और व्याख्यान दिए हैं।

‘केरल साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ (तीन बार कविता, आलोचना और नाटक के लिए), ‘उक्कूर पुरस्कार’, ‘पी. कुंजिरामन् नायर पुरस्कार’, ‘भारतीय भाषा परिषद् पुरस्कार’, ‘ओमान कल्चरल सेंटर अवार्ड’ और संस्कृति विभाग (भारत सरकार) की वरिष्ठ विद्वत-वृत्ति सहित आपको अनेक पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

आप केरल में पच्चीस वर्षों तक अंग्रेज़ी के प्राध्यापक रहे, ‘इंडियन लिटरेचर’ पत्रिका का सम्पादन किया और केन्द्रीय साहित्य अकादेमी के सचिव भी रहे।

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