Apurna Aur Anya Kavitayein

Poetry
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Apurna Aur Anya Kavitayein
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अपूर्ण और अन्य कविताएँ के. सच्चिदानन्दन की कविताओं के हिन्दी अनुवाद का एक महत्त्वपूर्ण संकलन है। इसके पहले उनकी कविताओं के दो हिन्दी संकलन ‘के. सच्चिदानन्दन की कविताएँ’ और ‘वह जिसे सब याद था’ प्रकाशित हो चुके हैं।

प्रस्तुत संकलन में मुख्यत: वे कविताएँ संगृहीत हैं जो यात्रानुभवों और प्रेम से सम्बद्ध हैं। एक लम्बी कविता ‘अपूर्ण’ इन दो विषयों को अनुस्‍यूत करती हैं : यह कविता स्टॉकहोम, दिल्ली और पेरिस में लिखी गई थी। 'उत्तरकांड' चीन पर लिखी कविताओं की शृंखला है—और यह ध्यान पर एकाग्र है। अध्यात्म, प्रेम, प्रकृति, राजनीति और कविताएँ सभी कविता के पाठ में शामिल हैं। ‘उत्कल’ और ‘हम्पी में शामें’—केवल स्थान विशेष का विवरण मात्र नहीं, बल्कि स्मृति और कल्पना से संघनित हैं। कवि की प्रेम कविताओं में जहाँ असाधारण तीव्रता है वहाँ समय की निरन्तर उपस्थिति को लक्ष्य किया जा सकता है। —संग्रह की अधिकांश कविताएँ हमारे समय के आक्रोश, बिखराव और विद्रोह को व्यक्त करती हैं। ये कविताएँ अपनी कल्पना-शक्ति, प्रखर अनुभूति, ध्यानपरकता और व्यंग्य-भाव के लिए जानी जाएँगी।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2001
Edition Year 2001, Ed. 1st
Pages 114p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Editorial Review

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K. Satchidanandan

Author: K. Satchidanandan

के. सच्चिदानन्दन 

जन्म : 28 मई, 1946

के. सच्चिदानन्दन मलयालम के आधुनिक और आधुनिकोत्तर कवियों में अग्रणी हैं। मलयालम में आपकी कविताओं के अलावा अनूदित कविताओं, नाटक, आलोचना और साक्षात्कार के कई संकलन प्रकाशित हैं। अंग्रेज़ी, तमिल, हिन्दी, गुजराती, कन्नड़, बांग्ला, पंजाबी और ओड़िया भाषाओं में अनूदित आपकी कविताओं के कई संकलन भी प्रकाशित हैं। आपकी अंग्रेज़ी रचनाओं का एक संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है।

आपने अंग्रेज़ी और मलयालम की अनेक पुस्तकों का सम्पादन भी किया है।

आपने अनेक अन्तरराष्ट्रीय काव्योत्सवों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है तथा अमेरिका, रूस, लातीविया, स्वीडेन, इटली, युगोस्लाविया, जर्मनी और चीन के अलावा भारत के विभिन्न भागों में आलेख और व्याख्यान दिए हैं।

‘केरल साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ (तीन बार कविता, आलोचना और नाटक के लिए), ‘उक्कूर पुरस्कार’, ‘पी. कुंजिरामन् नायर पुरस्कार’, ‘भारतीय भाषा परिषद् पुरस्कार’, ‘ओमान कल्चरल सेंटर अवार्ड’ और संस्कृति विभाग (भारत सरकार) की वरिष्ठ विद्वत-वृत्ति सहित आपको अनेक पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

आप केरल में पच्चीस वर्षों तक अंग्रेज़ी के प्राध्यापक रहे, ‘इंडियन लिटरेचर’ पत्रिका का सम्पादन किया और केन्द्रीय साहित्य अकादेमी के सचिव भी रहे।

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