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Sargoshiyan-Hard Cover

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9788183618854
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मैं किसी रवायत की अनुयायी नहीं हूँ। तभी कहीं काफ़िया नहीं मिलता कभी मीटर से बाहर हो जाती हूँ...नहीं हूँ मैं व्यवस्थित क़िस्म की पोएट...जब ज़िन्दगी एकदम सन्तुलित ना हो तो आप उसे कविताओं, कहानियों में कैसे व्यवस्थित दिखा सकते हैं...फिर ये तो झूठा होगा...सिर्फ़ छपने के लिए उन शब्दों को उठा के एक लाइन से दूसरी में शिफ़्ट कर दूँ...क्या वाक़ई में ज़िन्दगी में जो रिश्ता हमें रास नहीं आया...अपनी मर्ज़ी से हम उसे इधर से उधर शिफ़्ट कर सकते हैं...? नहीं ना...तो आप मुझे मेरी टूटी-फूटी बेतरतीब कविताओं के साथ स्वीकार करें!

 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2018
Edition Year 2018, Ed. 1st
Pages 79p
Price ₹195.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1
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Mamta Tiwari

Author: Mamta Tiwari

ममता तिवारी

जन्म : 14 मई, 1963

शिक्षा : एम.एससी. (रसायनशास्त्र)।

रेडियो आज़ाद, आकाशवाणी से प्रसारण; विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन; कार्यक्रमों का संचालन।

पुरस्कार : ‘अभिव्यक्ति’, ‘कला मंदिर’, ‘सुमन स्मृति’।

कृतियाँ : ‘क्या कह रही ज़िन्दगी’, ‘रेशमी ख़्वाब मखमली रातें’, ‘चुभती दोपहर’, ‘कहकशां’, ‘यूँ भी कभी-कभी’, ‘ख़्वाब शरारती’ और ‘मीरा नाचती रही’, ‘ख़त’, ‘सरगोशियाँ’।

ई-मेल : [email protected]

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