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Pracheen Ayodhya Ka Rajnaitik Evam Sanskritik Adhyayan-Hard Cover

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‘प्राचीन अयोध्या का राजनैतिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन’, शोध-प्रबन्ध के दस अध्यायों में अयोध्या की उन राजनैतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों की पौर प्रभा उकेरी गई है, जो उसे इतिहास में शतियों से अमर बनाई हुई है।

अयोध्या से प्राप्त सिक्के, शिलालेख, मृद्भांड, पाषाण शिल्प, ताम्रफलकाभिलेख और स्मारक हमें जहाँ अतीत के गलियारे में हज़ारों साल पीछे की ओर निहारने के लिए आकर्षित करते हैं, वहीं वैदिक साहित्य, पुराणों, रामायण, महाभारत, बौद्ध, जैन, संस्कृत, पाली/प्राकृत साहित्य, अरबी/तुर्की/फ़ारसी साहित्य के तुलनात्मक अनुशीलन से उत्तर मध्ययुग तक अयोध्या के इतिहास और संस्कृति के विविध आयाम प्रस्फुटित हुए हैं; कहीं तरंगायित सरयू, कहीं ऊँचे महलोंवाली अयोध्या, कहीं रघु की उदारता, कहीं राम की प्रजावत्सलता, वाल्मीकि की पहली कविता, कहीं-कहीं बौद्धयुगीन कृषि, धार्मिक, नगरीय क्रान्ति और गणतंत्रीय राज्यादर्श, सैन्य और दौत्य संगठन का अभिचित्रण इस पुस्तक में किया गया है। भारतीय राजतंत्र की प्रथम राजधानी अयोध्या को, इतिहास के विभिन्न युगों में भी, सूबाई राजधानी होने के गौरव प्राप्त होने के कारण ही उत्तरोत्तर राजनैतिक प्रतिष्ठा मिली; वहीं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अयोध्या की महिमा पहली शती से ही दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों; स्याम, हिंदेशिया, जावा और सुमात्रा में फैल चुकी थी। वस्तुतः प्राचीन भारत की अयोध्या राजनैतिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण नगरी रही है। प्राचीन अयोध्या ने हमें उत्तम नागर निदर्श, प्रशासन, वसुधैव कुटुम्बकम्, साझा संस्कृति, कला, काव्य लिपि, भाषा, सामाजिक-सांस्कृतिक सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता की अनुपम विरासत सौंपा है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2016
Edition Year 2016, Ed 1st
Pages 289p
Price ₹600.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
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Ram Bihari Upadhyay

Author: Ram Bihari Upadhyay

रामबिहारी उपाध्याय

जन्म : 2 जुलाई, 1956

शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी.

अध्यापन : 10 वर्ष तक स्नातक तथा स्नातकोत्तर कक्षाओं में।

पुरस्कार : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और भारतीय इतिहास अनुसन्धान परिषद, नई दिल्ली द्वारा पुरस्कृत। कई शोध-परियोजनाओं पर राष्ट्रीय पुरस्कार।

प्रकाशन : चार दशक से देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में शोधात्मक लेख प्रकाशित।

सम्प्रति : पिछले कई वर्षों से अध्यक्ष, कोशल शोध संस्थान, बराँव, जनपद—अम्बेडकरनगर (उ.प्र.)

 

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