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Photo Patrakarita-Hard Cover

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9789349180987
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हमारा समय विजुअल कम्युनिकेशन यानी दृश्य संचार का समय है। वास्तविक दुनिया हो या आभासी दुनिया, हर तरफ छवियां ही छवियां हैं। कास्टिंग के लगभग सारे उपक्रम यानी प्रिंटकास्ट, ब्रॉडकास्ट, टेलीकास्ट, वेबकास्ट और ह्यूमनकास्ट अनायास ही छवियों के अधिकाधिक प्रयोग की होड़ में शामिल हो गए हैं। संचार के क्षेत्र में छवियों यानी दृश्यों के इस तरह प्रयोग से जन-संप्रेषण की दुनिया में बड़ा बदलाव आया है। इस बदलाव का कारण बना, हमारे मोबाइल फोन में कैमरे का आ जाना। इक्वींसवीं सदी के प्रारंभ से ही लोगों ने अपने आसपास के दृश्यों को सहेजना शुरू कर दिया था। दृश्यों के माध्यम से जन इतिहास का लिखा जाना यह बता रहा था कि आने वाले समय में शब्दों से कहीं अधिक दृश्य पढ़े जाएंगे। हुआ भी यही, हमने एक ऐसे समाज की रचना कर ली है, जिसमें दृश्य संचार के बिना रह पाना मुश्किल हो रहा है। टेक्नोलॉजी के बलबूते बदलती दुनिया और बदलते समय में दृश्य संस्कृति विकसित हो रही है। दृश्य गढ़े जा रहे हैं, रचे जा रहे हैं, प्रस्तुत किए जा रहे हैं और पढ़े जा रहे हैं। अब से पहले इतने अधिक दृश्यों का आदान-प्रदान कभी नहीं हुआ था। दरअसल यह दृश्य विस्फोट यानी विजुअल एक्सप्लोजन का समय है। यह फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता को सीखने, समझने, सहेजने और संचरित करने का अप्रतिम समय है।

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 204p
Price ₹795.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 24 X 16 X 1.5
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Dhananjai Chopra

Author: Dhananjai Chopra

धनंजय चोपड़ा

2 जुलाई, 1966 को इलाहाबाद में जन्म। जनसंचार में पीएचडी के लिए 'नक्सलवाद और समाचार मीडिया' विषय पर शोध कार्य। 'के.के. बिड़ला फेलोशिप' के अन्तर्गत 'साहित्य के पुरस्कारों का इतिहास, स्वरूप और मूल्यांकन' विषय पर तथा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की 'सीनियर फेलोशिप' के अन्तर्गत 'जनसंचार की वाचिक परम्परा का अप्रतिम साधन बिरहा लोकगीत' विषय पर शोध कार्य किया।

'संगम की रेती पर चालीस दिन', 'पंडवानी गायिका तीजन बाई', 'सिर्फ समाचार', 'पत्रकारिता तब से अब तक', 'पत्रकारिता के युग निर्माता मदन मोहन मालवीय', 'नेल्सन मण्डेला नये युग के प्रणेता', 'वैज्ञानिकों से साक्षात्कार', 'नाभिकीय ऊर्जा और समाचार मीडिया', व्यंग्य संग्रह 'छपाक का सुख, गिफ्ट ऑफर में' 'मानवाधिकार, मीडिया और जन-सरोकार' एवं 'कजरी लोक गायन' पुस्तकें प्रकाशित। भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा बाबूराव विष्णु पराड़कर पुरस्कार एवं धर्मवीर भारती पुरस्कार, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली द्वारा महात्मा गांधी हिन्दी लेखन पुरस्कार तथा विज्ञान परिषद, इलाहाबाद द्वारा शताब्दी सम्मान आदि प्राप्त हो चुका है। पच्चीस वर्षों से अधिक समय तक सक्रिय पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेण्टर ऑफ मीडिया स्टडीज में पाठ्यक्रम समन्वयक पद पर कार्यरत।

सम्पर्क : 515, विनायक इन्क्लेव, अशोक नगर, इलाहाबाद

ईमेल : [email protected]

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