Sanchar Shodh Aur Media

Communication and Media Studies
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वास्तव में जैसे-जैसे मीडिया का वैविध्य बढ़ रहा है, वैसे-वैसे मीडिया शोध की आवश्यकता और उसकी प्रवृत्तियों में भी बदलाव और विकास देखने को मिल रहा है। बीसवीं सदी के अन्तिम दशक में जब मीडिया के विभिन्न उपक्रमों को नये-नये आयाम मिल रहे थे, तभी मीडिया शोध की नयी-नयी प्रवृत्तियाँ भी जन्म ले रही थीं। यही वह समय था जब भारत में टेलीविजन प्रसारण मजबूत हो रहा था और वेब संचार की दुनिया आकार ले रही थी। मीडिया और बाजार के रिश्ते नये रूप-रंग ले रहे थे और मीडिया के साथ उसके पाठकों, श्रोताओं

और दर्शकों के रिश्तों को नये-नये रंग-ढंग मिल रहे थे। टेक्नोलॉजी के सहारे अगर मीडिया बदल रहा था तो सामाजिक तानेबाने में भी खूब परिवर्तन देखने को मिल रहे थे। वास्तव में यही वह समय था, जब मीडिया शोध को नयी पहचान मिली। नयी सदी यानी इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में ही अकादमिक और औद्योगिक आवश्यकताओं और इनके मिले-जुले प्रयासों ने मीडिया शोध के क्षेत्र को समृद्ध तो किया ही, साथ ही इसे जीवन्त निरन्तरता भी प्रदान की। यही वजह है कि मीडिया शोध की नयी-नयी प्रवृत्तियाँ विकसित हो चुकी हैं और अब नये-नये आयाम सामने आ रहे हैं।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2021
Edition Year 2021, Ed. 1st
Pages 190p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 23.5 X 16 X 1.5
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Editorial Review

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Dhananjai Chopra

Author: Dhananjai Chopra

धनंजय चोपड़ा

2 जुलाई, 1966 को इलाहाबाद में जन्म। जनसंचार में पीएचडी के लिए 'नक्सलवाद और समाचार मीडिया' विषय पर शोध कार्य। 'के.के. बिड़ला फेलोशिप' के अन्तर्गत 'साहित्य के पुरस्कारों का इतिहास, स्वरूप और मूल्यांकन' विषय पर तथा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की 'सीनियर फेलोशिप' के अन्तर्गत 'जनसंचार की वाचिक परम्परा का अप्रतिम साधन बिरहा लोकगीत' विषय पर शोध कार्य किया।

'संगम की रेती पर चालीस दिन', 'पंडवानी गायिका तीजन बाई', 'सिर्फ समाचार', 'पत्रकारिता तब से अब तक', 'पत्रकारिता के युग निर्माता मदन मोहन मालवीय', 'नेल्सन मण्डेला नये युग के प्रणेता', 'वैज्ञानिकों से साक्षात्कार', 'नाभिकीय ऊर्जा और समाचार मीडिया', व्यंग्य संग्रह 'छपाक का सुख, गिफ्ट ऑफर में' 'मानवाधिकार, मीडिया और जन-सरोकार' एवं 'कजरी लोक गायन' पुस्तकें प्रकाशित। भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा बाबूराव विष्णु पराड़कर पुरस्कार एवं धर्मवीर भारती पुरस्कार, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली द्वारा महात्मा गांधी हिन्दी लेखन पुरस्कार तथा विज्ञान परिषद, इलाहाबाद द्वारा शताब्दी सम्मान आदि प्राप्त हो चुका है। पच्चीस वर्षों से अधिक समय तक सक्रिय पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेण्टर ऑफ मीडिया स्टडीज में पाठ्यक्रम समन्वयक पद पर कार्यरत।

सम्पर्क : 515, विनायक इन्क्लेव, अशोक नगर, इलाहाबाद

ईमेल : c.dhananjai@gmail.com

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