Facebook Pixel

Patrakarita : Mission se Media tak-Hard Cover

Special Price ₹845.75 Regular Price ₹995.00
15% Off
In stock
SKU
9788126709687
- +
Share:
Codicon

यह पुस्तक अपने पेशे के सहकर्मियों और पाठकों के साथ एक ऐसे व्यक्ति की बहस, नोक-झोंक है जो चीजों को उनके सही नाम से पुकारता है, धुँधलके में रहना और किसी को रखना पसंद नहीं करता। वह व्यक्ति थेµ अखिलेश मिश्र, जिनकी धर्म-संस्कृति विषयक पुस्तक ‘धर्म का मर्म’ पाठक पढ़ चुके हैं।

इस पुस्तक में अखिलेश जी के वे लेख संकलित हैं जिनमें उन्होंने पत्रकारिता के विविध आयामों, उसकी समस्याओं, संकटों, उसके विचलनों, उसकी ताकत और कमजोरियों की चर्चा की है। पुस्तक चार खंडों में है। पहले खंड में वे लेख हैं जिनमें पत्रकारिता सम्बन्धी विविध विषयों, समस्याओं का गहन विश्लेषण है। द्वितीय खंड में ‘वर्कर्स हेरल्ड’ में लिखे उनके वे संपादकीय हैं जिनका विषय पत्रकार अथवा पत्रकारिता है। इस खंड का पहला आलेख ‘स्वतंत्र भारत’ में लगभग सत्रह वर्ष तक अनवरत चले उनके पाक्षिक स्तम्भ ‘दिल्ली का रंगमंच’ से लिया गया है। इसमें श्री मिश्र ने लोकतान्त्रिाक मूल्यों में गहरी आस्था के लिए जाने जानेवाले नेहरू जैसे प्रधानमंत्राी की भी अखबारों की उस आजादी के प्रति नाराजगी को पकड़ा है जो सत्ता के लिए परेशानी पैदा कर दे।

खंड तीन में ‘वर्कर्स हेरल्ड’ में ही संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित वे लेख लिये गए हैं जिनमें पत्रकारिता के सरोकारों की चर्चा है। इस खंड में अन्य अनेक समस्याएँ उठाने के अतिरिक्त लेखक ‘श्रम नीति का दुरंगापन’ बेपर्दा करते हुए ‘पत्रकारों की सुरक्षा’ के सवाल से जुड़ी पेचीदगियों से दो-चार होता है। खंड चार में दो लेख शामिल हैं, जिनमें समाचार क्या है, कैसे लिखे जाते हैं, आदि व्यावहारिक पहलुओं पर उनके विचार हैं।

पत्रकारिता इस समय एक संकट के दौर में है। पुराने दबावों (मालिक और सत्ता) तथा अपनी कमजोरियों के अतिरिक्त भूमंडलीकरण के इस दौर में अब एक नया खतरा उसके सामने हैµअखबारी उद्योग में विदेशी पूँजी निवेश जिसके निहितार्थ बहुत गहरे हैं। हमारा विश्वास है कि अखिलेश जी की यह पुस्तक न केवल धुँधलका छाँटकर परिदृश्य स्पष्ट करेगी बल्कि अपनी स्पष्ट दृष्टि से आगामी पत्रकारिता का मार्गदर्शन भी करेगी।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Publication Year 2004
Edition Year 2022, Ed. 2nd
Pages 287p
Price ₹995.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 20.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Patrakarita : Mission se Media tak-Hard Cover
Your Rating
Akhilesh Mishra

Author: Akhilesh Mishra

अखिलेश मिश्र

जन्म : 22 अक्तूबर, 1922; सेमरौता, रायबरेली (उ.प्र.)।

विश्वविद्यालय में अध्यापन के प्रस्तावों को ठुकराकर हिन्दी पत्रकारिता को अपना पेशा बनाया, क्योंकि ‘जनता के पहरुए कूकुर’ की भूमिका पसन्‍द थी। ‘अधिकार’ से पत्रकारिता आरम्‍भ कर वे ‘स्वतंत्र भारत’, ‘दैनिक जागरण’, ‘स्वतंत्र चेतना’, ‘स्वतंत्र मत’ आदि दैनिक समाचार-पत्रों के सम्पादक रहे। साक्षरता अभियान में उनका अमूल्य योगदान रहा।

समय-समय पर उन्हें अनेक पुरस्कार-सम्मान दिए गए, लेकिन उन्होंने कोई सम्मान स्वीकार नहीं किया।

पुस्तकें : ‘धर्म का मर्म’, ‘पत्रकारिता : मिशन से मीडिया तक’ तथा ‘पाँवों का सनीचर के अलावा साक्षरता अभियान के तहत लिखी गई कई पुस्तकें प्रकाशित हैं जिनमें कुछ हैं : ‘मुक़द्दर की मौत’, ‘गाँव में जादूगर’, ‘बन्‍द गोभी का नाच’, ‘प्रधान का इलाज’ आदि। कुछ अनुवाद भी प्रकाशित जिनमें ‘अन्तरराष्ट्रीय राजनीति के मूल तत्त्व’ (मार्ग्रेट तथा हेराल्ड स्प्राउट कृत), ‘लालबहादुर शास्त्री’, ‘मार्क्स तथा आधुनिक सामाजिक सिद्धान्‍त’ (एलेन स्विंजवुड) उल्लेखनीय हैं।

शोध-पत्र : ‘ए फैलेसी फेस्ड’ (2002 में लखनऊ विश्वविद्यालय में जमा किया गया)।

अन्तिम समय तक लेखन के साथ-साथ जनान्‍दोलनों में भी सक्रिय भागीदारी। मानवाधिकारों के लिए सतत् संघर्षशील रहे। लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में विजिटिंग प्रोफ़ेसर भी रहे।

निधन : 22 नवम्बर, 2002 (लखनऊ)।

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top