जापान में जब पूँजीवादी औद्योगीकरण की शुरुआत हुई तब समाज का सांस्कृतिक और राजनीतिक ढाँचा तेज़ी से बदलने लगा। पूँजीवादी समाज में विकास के नाम पर हाशिए पर धकेले गए प्रताड़ित लोगों के दु:ख–दर्द को मार्मिक स्पर्श दिया है जापान के तीन प्रगतिवादी लेखकों ने। इनकी सशक्त शैली और वैचारिक सघनता का प्रवाहपूर्ण हिन्दी अनुवाद मूल जापानी स्रोत से किया गया है।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Hard Back |
| Editor | Not Selected |
| Isbn 10 | 8126706147 |
| Publication Year | 2002 |
| Edition Year | 2023, Ed. 2nd |
| Pages | 92p |
| Price | ₹495.00 |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Dimensions | 22 X 14 X 1 |