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Mahadevi Varma Ke Kavya Mein Saundarya-Bhavana-Hard Cover

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9788180318214
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छायावादी काव्य के विकास में महादेवी वर्मा का योगदान अप्रतिम है। वे अपने समय के कवियों में एक अलौकिक भावजगत का सृजन कर छायावादी काव्य-धारा को एक नई सौन्दर्य-दृष्टि प्रदान करती हैं। यही कारण है कि उन्हें छायावादी काव्य-धारा में रहस्यवादी भाव-धारा का प्रमुख कवि माना जाता है। सर्वथा नए उपमान, अमूर्तन, लाक्षणिकता, प्रतीक, बिम्ब उनके काव्य को लालित्य-योजना की दृष्टि से एक ऐसा आयाम प्रदान करते हैं जो छायावादी कवियों में उनकी अपनी अलग पहचान बनाता है।

प्रस्तुत ग्रन्थ में लेखक ने महादेवी वर्मा की सौन्दर्य-दृष्टि से बचकर लेखक ने भारतीय और पाश्चात्य सौन्दर्यशास्त्र के ज्ञान का गम्भीर उपयोग किया है। यही कारण है कि प्रस्तुत पुस्तक महादेवी वर्मा के काव्य-विवेचन में नई दृष्टि का समावेश कर सकी है। शास्त्रीय और समसामयिक काव्यालोचन में प्रस्तुत पुस्तक का सुनिश्चित योगदान है।

 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 1989
Edition Year 2013, Ed. 2nd
Pages 272p
Price ₹500.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Author: Govind Pal Singh

गोविन्द पाल सिंह

डॉ. गोविन्द पाल सिंह एस.आर.के.कॉलेज फिरोजाबाद के हिंदी विभाग में प्रवक्ता थे. इन्होने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की

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