Laute Huye Musafir

Author: Kamleshwar
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Laute Huye Musafir
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कहानी-लेखन में अपनी विशिष्ट पहचान के साथ कमलेश्वर ने अपने छोटे कलेवर के उपन्यासों में मध्यवर्गीय जीवन के चित्रण को लेकर छठे-सातवें दशक के हिन्दी परिदृश्य में अपना अलग स्थान बनाया। देश-दुनिया, समाज-संस्कृति और राजनीति से जुड़े विषय भी अक्सर उनकी कथा-रचनाओं के विषय बने हैं। ‘काली आँधी’ और ‘कितने पाकिस्तान’ जैसी रचनाओं के लिए विशेष रूप से ख्यात कमलेश्वर की लेखनी मध्यवर्गीय जीवन की विडम्बनाओं पर ही ठहरती है।

वर्ष 1961 में प्रकाशित इस उपन्यास ‘लौटे हुए मुसाफिर’ में स्वतंत्रता के आगमन के साथ गम्भीर रूप धारण करती साम्प्रदायिकता की समस्या और भारत विभाजन के नाम पर बेघर-बार हुए मुस्लिम समाज के मोहभंग और उनकी वापसी की विवशता को दर्शाया गया है। यह इस उपन्यास की प्रभावशाली रचनात्मकता और इतिहास-बोध के कारण ही सम्भव हुआ कि इस छोटे से उपन्यास का उल्लेख भारत-विभाजन पर केन्द्रित गिने-चुने हिन्दी उपन्यासों में प्रमुखता के साथ किया जाता है।

अपनी आवेशयुक्त शैली में कमलेश्वर ने इस कृति में आज़ादी और विभाजन के ऊहापोह में फँसे हिन्दुओं और मुसलमानों की मनःस्थिति के साथ भारत के सामाजिक ताने-बाने में आए निर्णायक बदलाव को भी रेखांकित किया है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2015
Edition Year 2015, Ed. 1st
Pages 112p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1
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Kamleshwar

Author: Kamleshwar

कमलेश्वर

कमलेश्वर का जन्म उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में 6 जनवरी, 1932 को हुआ था। प्रारम्भिक पढ़ाई के पश्चात् कमलेश्वर ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से परास्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की।

कमलेश्वर ने कहानी, उपन्यास, पत्रकारिता, स्तम्भ-लेखन, फ़िल्म पटकथा जैसी अनेक विधाओं में अपनी लेखन-प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने कई हिन्दी फ़िल्मों के लिए पटकथाएँ लिखीं तथा भारतीय दूरदर्शन शृंखलाओं के लिए दर्पण’, ‘चन्द्रकान्ता’, ‘बेताल पच्चीसी’, ‘विराट युगआदि लिखे।

प्रकाशित कृतियाँ : राजा निरबंसिया’, ‘क़स्बे का आदमी’, ‘मांस का दरिया’, ‘खोई हुई दिशाएँ’, ‘बयान’, ‘जॉर्ज पंचम की नाक’, ‘आज़ादी मुबारक’, ‘कोहरा’, ‘कितने अच्छे दिन’, ‘मेरी प्रिय कहानियाँ’, ‘मेरी प्रेम कहानियाँ (कहानी-संग्रह); ‘एक सड़क सत्तावन गलियाँ’, ‘डाक-बंगला’, ‘तीसरा आदमी’, ‘समुद्र में खोया हुआ आदमी’, ‘लौटे हुए मुसाफ़िर’, ‘काली आँधी’, ‘वही बात’, ‘आगामी अतीत’, ‘सुबह दोपहर शाम’, ‘एक और चन्द्रकान्ता’, ‘कितने पाकिस्तान’, ‘पति पत्नी और वह (उपन्यास); ‘अधूरी आवाज़’, ‘चारुलता’, ‘रेगिस्तान’, ‘कमलेश्वर के बाल नाटक (नाटक); ‘खंडित यात्राएँ’, ‘अपनी निगाह में (यात्रा-संस्मरण); ‘जो मैंने किया’, ‘यादों के चिराग़’, ‘जलती हुई नदी (आत्मकथ्य); ‘नई कहानी के बाद’, ‘मेरा पन्ना’, ‘दलित साहित्य की भूमिका (आलोचना); ‘मेरा हमदम : मेरा दोस्त तथा अन्य संस्मरण’, ‘समानान्तर-1’, ‘गर्दिश के दिन’, ‘मराठी कहानियाँ’, ‘तेलगू कहानियाँ’, ‘पंजाबी कहानियाँ’, ‘उर्दू कहानियाँ (सम्पादन)।

सम्मान/पुरस्कार : पद्मभूषणऔर कितने पाकिस्तान के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कारसे सम्मानित।

निधन : 27 जनवरी, 2007

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