Kuchh Kahaniyan : Kuchh Vichar

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Kuchh Kahaniyan : Kuchh Vichar
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रचना और पाठक के बीच समीक्षक या आलोचक नाम की तीसरी श्रेणी ज़रूरी है या नहीं, यह शंका पुरानी है। सामाजिक या राजनीतिक ज़रूरत के रूप में यह श्रेणी अपनी उपादेयता बार-बार प्रमाणित करती रही है। लेकिन साहित्यिक ज़रूरत के रूप में? यह ख़ास ज़रूरत दरअसल न हमेशा पेश आती है और न पूरी होती है। यह ज़रूरत तो बनानी पड़ती है। आलोचना या समीक्षा की विरली ही कोशिशें ऐसी होती हैं जो पाठक को रचना के और-और क़रीब ले जाती हैं, और-और उसे उसके रस में पगाती हैं। ये कोशिशें रचना के समानान्तर ख़ुद में एक रचना होती हैं। मूल के साथ एक ऐसा रचनात्मक युग्म उनका बँटा है कि जब भी याद आती हैं, दोनों साथ ही याद आती हैं।

इस पुस्तक में संकलित समीक्षाएँ ऐसी ही हैं। बड़बोलेपन के इस ज़माने में विश्वनाथ त्रिपाठी ने एक अपवाद की तरह हमेशा ‘अंडरस्टेटमेंट’ का लहज़ा अपनाया है। उनके लिखे पर ज़्यादा कहना भी अनुचित के सिवाय और कुछ नहीं है। इतना कहना लेकिन ज़रूरी लगता है कि कुछ स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी कहानियों पर लिखी ये समीक्षाएँ पढ़ने के बाद वे कहानियाँ फिर-फिर पढ़ने को जी करता है। हमारे लिए वे वही नहीं रह जातीं, जो पहले थीं।

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LanguageHindi
FormatHard Back
Publication Year1998
Edition Year2015, Ed. 2nd
Pages155p
TranslatorNot Selected
EditorNot Selected
PublisherRajkamal Prakashan
Dimensions22.5 X 14 X 1.6
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Editorial Review

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Vishwanath Tripathi

Author: Vishwanath Tripathi

विश्वनाथ त्रिपाठी

जन्म : 16 फ़रवरी, 1931; ज़िला बस्ती (अब सिद्धार्थनगर) के बिस्कोहर गाँव में।

शिक्षा : पहले गाँव में, फिर बलरामपुर क़स्बे में, उच्च शिक्षा कानपुर और वाराणसी में। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से पीएच.डी.।

प्रमुख कृतियाँ : ‘प्रारम्भिक अवधी’, ‘हिन्दी आलोचना’, ‘हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास’, ‘लोकवादी तुलसीदास’, ‘मीरा का काव्य’, ‘कुछ कहानियाँ : कुछ विचार’, (आलोचना); ‘देश के इस दौर में’ (परसाई केन्द्रित), ‘पेड़ का हाथ’ (केदारनाथ अग्रवाल केन्द्रित), ‘जैसा कह सका’ (कविता संकलन); ‘नंगातलाई का गाँव’ (स्मृति-आख्यान); ‘व्योमकेश दरवेश’ (आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का पुण्य स्मरण)।

सम्पादन : आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के साथ अद्दहमाण (अब्दुल रहमान) के अपभ्रंश काव्य ‘सन्देश रासक’ का सम्पादन; ‘कविताएँ 1963’, ‘कविताएँ 1964’, ‘कविताएँ 1965’ (तीनों अजित कुमार के साथ); ‘हिन्दी के प्रहरी : रामविलास शर्मा’ (अरुण प्रकाश के साथ)।

सम्मान : ‘मूर्तिदेवी सम्मान, ‘व्यास सम्मान’, ‘सोवियत लैंड नेहरू सम्मान’, ‘शलाका सम्मान’, ‘भारत भारती पुरस्कार’, ‘राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’, ‘राजकमल प्रकाशन सृजनात्मक गद्य सम्मान’, ‘शमशेर सम्मान’, ‘गोकुलचन्द्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार’, ‘डॉ. रामविलास शर्मा सम्मान’, ‘हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान’ आदि।

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