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निलय उपाध्याय का कविता–संग्रह ‘कटौती’ आज लिखी जा रही कविता के समूचे परिदृश्य में एक नई काव्य–सम्भावना से भरपूर किसी महत्त्वपूर्ण दिशासूचक, सृजनात्मक परिघटना की तरह उपस्थित है। पिछले कुछ वर्षों से महत्त्वपूर्ण हो उठे महानगर के काव्य–वर्चस्व को एक नितान्त वरिष्ठ काव्य–सामर्थ्य और भिन्न काव्य–संरचना के माध्यम से चुनौती देती ये कविताएँ हमें अनुभवों के उस दैनिक संसार में सीधे ले जाकर खड़ा करती हैं, जहाँ ध्वंस और निर्माण, विनाश और संरक्षण, हिंसा और करुणा के अब तक कविता में अनुपस्थित अनेक रूप अपनी समूची गतिमयता, टकराहटों, विकट अन्तर्द्वन्द्वों और अलक्षित आयामों के साथ उपस्थित हैं।

‘कटौती’ की ये कविताएँ हम तक हमारे अपने समय के उस वर्तमान की दुर्लभ और अलभ्य सूचनाओं को पहुँचाकर एक साथ स्तब्ध और सचेत करने का कठिन प्रयत्न करती हैं, जिस वर्तमान को इसी दौर की अन्य कविताएँ या तो अतीत की तरह देखने की आदी हो चुकी हैं, या फिर उसे ‘लोक अनुभव’ मानकर स्वयं उस महानगरी ‘फोक’ ग्रन्थि का उदाहरण बन जाती हैं, जो एक तरफ़ सरलतावादी प्रगीतात्मकता और दूसरी तरफ़ ‘प्रकृतिवादी’ नॉस्टेल्जिया के प्रचलित विन्यासों और सर्व–स्वीकृत काव्योक्तियों में पिछले लम्बे अरसे से अपरिचित होकर भी सम्मानित बनी हुई है। निलय उपाध्याय की ये कविताएँ एक अद्भुत निस्संगता, निस्पृहता, रचनात्मक कौशल और विरल तल्लीनता के साथ, एक नई और सहजात काव्याभिव्यक्ति के द्वारा इस ‘सम्मानित’ को चुपचाप अपदस्थ करती हैं।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2000
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 112p
Price ₹199.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 0.5
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Nilay Upadhayaya

Author: Nilay Upadhayaya

निलय उपाध्याय

28 जनवरी, 1963 को बिहार में जन्मे निलय उपाध्याय हिन्दी के सुपरिचित कवियों में एक हैं। इनके कविता-संकलन हैं—‘अकेला घर हुसैन का’, ‘कटौती’ और ‘जिबह वेला’। इनके दो उपन्यास—‘अभियान’ और ‘वैतरनी’ प्रकाशित हो चुके हैं। कुछ साल पहले इन्होंने गंगोत्री से गंगा सागर तक की साइकिल से यात्रा की। ये मुम्बई में रहते हैं और पटकथा-लेखन से जुड़े हैं। ‘देवों के देव महादेव’ सीरियल और कई फ़िल्में लिख चुके हैं। इनका नाटक ‘पॉपकॉर्न विद परसाई’ एक लोकप्रिय कृति है। ‘पहाड़’ इनका तीसरा उपन्यास है जो दशरथ मांझी के जीवन पर आधारित है।

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