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Kanyapaksh-Paper Back

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9789352210121
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अतीत-काल में नारी-चरित्र का एक ही रूप था, जिससे सभी परिचित थे! वह रूप था, उर्वशी का उर्वशी एक सनातन चरित्र बनकर अमर हुई। जो किसी की माँ नहीं, बेटी नहीं, वधू नहीं—है सिर्फ़ उर्वशी। लेकिन कालान्तर में उर्वशी ने बहुत-बहुत रंग बदले, बहुत-बहुत रूप धरे। उर्वशी का एक-एक अंश कोटि-कोटि नारियों में फैलकर उन्हें विचित्र चरित्र का नमूना बना गया। ‘कन्यापक्ष’ के वे ही विभिन्न पहलू हैं। सुधा सेन, अलका पाल, मीठी दीदी, मिछरी भाभी, मिली मल्लिक और सोना दीदी। सभी मामूली लड़कियाँ पर एक-दूसरे से कितनी भिन्न, कितने विचित्र चरित्र। और उर्वशी के इन विभिन्न अंश-रूपों को ढूँढ़ निकालना और उन्हें सजीव चरित्र का रूप देकर कथा में गढ़कर ‘कन्यापक्ष’ प्रस्तुत करना ही तो बिमल मित्र की लेखनी का चमत्कार है।

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2015
Edition Year 2024, Ed. 2nd
Pages 138p
Price ₹199.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Bimal Mitra

Author: Bimal Mitra

बिमल मित्र

बांग्ला के प्रसिद्ध लेखक।

जन्म : 18 मार्च, 1912 को कोलकाता में।

शिक्षा : कोलकाता विश्वविद्यालय से एम.ए.।

अनेक कहानियों और लगभग 70 उपन्यासों के रचयिता बिमल मित्र बांग्लाभाषी समाज के अलावा हिन्दी व तमिल समाज में भी समान रूप से लोकप्रिय हैं।

प्रमुख कृतियाँ : ‘अन्यरूप’, ‘साहब बीबी गुलाम’, ‘मैं’, ‘राजाबदल’, ‘परस्त्री’, ‘इकाई दहाई सैकड़ा’, ‘खरीदी कौड़ियों के मोल’, ‘मुजरिम हाजिर’, ‘पति परम गुरु’, ‘बेगम मेरी विश्वास’, ‘चलो कलकत्ता’ (उपन्यास); ‘पुतुल दीदी’, ‘रानी साहिबा’ (कहानी-संग्रह); ‘कन्यापक्ष’ (रेखाचित्र)।

निधन : 2 दिसम्बर, 1991

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