Krishna Mohan Jha
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कृष्णमोहन झा
कृष्णमोहन झा का जन्म 10 अगस्त, 1968 को उत्तरी बिहार के सहरसा जिले के जीतपुर गाँव में हुआ। उन्होंने उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। द्विभाषी कवि हैं। हिन्दी में ‘समय को चीरकर’ (1998), ‘तारों की धूल’ (2025) और मैथिली में ‘एकटा हेरायल दुनिया’ (2008) उनके प्रकाशित कविता-संग्रह हैं। उन्होंने विद्यापति के गीतों के एक संचयन ‘भनइ विद्यापति’ (2014) का सम्पादन किया है। ‘प्रतिलिपि’ और ‘इंडियन लिटरेचर’ में उनकी कई कविताओं के अंग्रेज़ी अनुवाद प्रकाशित हैं। हिन्दी कविताओं के अंग्रेज़ी में अनूदित संग्रह ‘होम फ़्रॉम अ डिस्टेंस’ (सं. गिरिराज किराडू, राहुल सोनी) और वैश्विक कविता-संग्रह ‘ग्रीनिंग द अर्थ’ (सं. के. सच्चिदानन्दन, निशि चावला) के एक सहयोगी कवि हैं। असमिया, बांग्ला, मराठी, तेलुगु, उर्दू और नेपाली में भी उनकी कविताएँ अनूदित हैं।
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