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Hum, Bharat Ke Rajyon Ke Log-Hard Cover

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9789360861117
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भारत के नौ प्रान्त तथा वे 562 रियासतें जो अगस्त, 1947 में मौजूद थीं, आज आज़ादी के 75वें साल में देश के नक़्शे पर कहीं दिखाई नहीं देतीं, यह तथ्य अपनी राजनीतिक व प्रशासनिक सीमाओं को लेकर अपने नागरिकों को विश्वास में लेने की राष्ट्र की क्षमता को दर्शाता है। राज्यों के मद्देनज़र भारत की पुनर्कल्पना की प्रक्रिया एक तरफ़ जहाँ प्रशासनिक ज़रूरतों से प्रभावित हुई, वहीं आन्तरिक सीमाओं का पुनर्गठन विभिन्न भाषायी और जातीय समूहों की आकांक्षाओं को समायोजित करने के लिए भी हुआ, वे समूह जो राज्य और संघीय राजनीति में अपना स्थान चाहते थे।

प्रस्तुत अध्ययन डॉ. संजीव चोपड़ा ने राज्य अभिलेखों और भूमि बन्दोबस्त के लिए भूमि मापन उपकरणों पर शोध के रूप में शुरू किया था, जो होते-होते राज्य सीमाओं के मानचित्रण तथा भारत के भूगोल के माध्यम से इसके समकालीन राजनीतिक इतिहास के आख्यान के रूप में बदल गया। इस पुस्तक में राज्य पुनर्गठन आयोग, भाषायी पुनर्गठन आयोग, राजकीय दस्तावेजों और विदेश तथा राष्ट्रमंडल कार्यालय के दस्तावेजों से ली गई मूल्यवान सामग्री के साथ इस आख्यान को रचा गया है।

राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों के 1947 से अब तक हुए एकाधिक सीमा-निर्धारणों के बारे में यह पुस्तक प्रामाणिक तथ्यों के साथ प्रकाश डालती है। यह बताती है कि भारत ने कैसे अपने आपको लगातार पुनर्परिभाषित किया है और कर रहा है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Sachin Chauhan
Editor Not Selected
Publication Year 2024
Edition Year 2024, Ed. 1st
Pages 364p
Price ₹995.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2.5
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Sanjeev Chopra

Author: Sanjeev Chopra

संजीव चोपड़ा

संजीव चोपड़ा का जन्म 3 मार्च, 1961 को हुआ। वे छत्तीस वर्षों तक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में सेवारत रहने के बाद मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए। ह्यूबर्ट एच. हम्फ़्री फ़ेलोशिप (कॉर्नेल) तथा रॉबर्ट एस. मैक्नमरा फ़ेलोशिप (वर्ल्ड बैंक) धारक हैं। उन्होंने रॉयल एशियाटिक सोसाइटी, लन्दन और लक्ष्मी मित्तल एंड फ़ैमिली साउथ एशिया इंस्टिट्यूट (हार्वर्ड) एवं यूएसआई, नई दिल्ली में महत्त्वपूर्ण पदों पर सेवाएँ दी हैं। वर्तमान में यूपीईएस में लोक नीति तथा स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय में इतिहास और लोक नीति के प्रोफ़ेसर हैं। साथ ही दून विश्वविद्यालय में एनटीपीसी चेयर प्रोफ़ेसर के सलाहकार समूह के प्रमुख का दायित्व भी निभा रहे हैं। वे बांग्लादेश, मालदीव, भूटान, कंबोडिया और अफ़्रीकी देशों के सिविल सेवकों के लिए आयोजित किये जाने वाले, विदेश मंत्रालय द्वारा प्रायोजित एनसीजीजी (नेशनल सेंटर फ़ॉर गुड गवर्नेंस) के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित वक्ता हैं। वर्तमान में देहरादून में रहते हैं और बतौर फ़ेस्टिवल डायरेक्टर वैली ऑफ़ वर्ड्स साहित्य एवं कला महोत्सव का हर वर्ष नवम्बर माह में आयोजन करते हैं।

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