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Hindi Aalochana Aur Bhaktikavya-Hard Cover

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9788119989553
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‘हिन्दी आलोचना और भक्तिकाव्य’ में रुस्तम राय ने  हिन्दी आलोचना के मूल्य-निर्माण की प्रक्रिया, काव्य में लोकमंगल की अवधारणा और उसका संधान, सौन्दर्यानुभूति की पहचान, भक्तिकाव्य की सामाजिक भूमिका, काव्यानुभूति की विशुद्धता और भक्तिकाव्य की प्रगतिशीलता पर विस्तार-पूर्वक विचार किया है। उन्होंने हिन्दी आलोचना के मूल्य-निर्माण की प्रक्रिया के साथ-साथ हिन्दी आलोचकों के भक्तिकाव्य विषयक मूल्यांकन को विस्तृत रूप से प्रस्तुत करते हुए अपने मौलिक विचार भी प्रकट किए हैं। एक प्रकार से हिन्दी आलोचना और भक्तिकाव्य, दोनों पर इस किताब में पुनर्विचार का प्रयत्न है और भक्तिकाव्य से हिन्दी आलोचना के अंतरंग सम्बन्ध की नई व्याख्या भी। लेखक ने सगुण-निर्गुण और उसके सामाजिक आधारों पर विचार करते हुए न केवल भक्त कवियों के आन्तरिक द्वन्द्व को बल्कि आलोचकों के मतों के अन्तर्विरोध को भी उजागर किया है।

कबीर और तुलसी के प्रसंग में उठनेवाले विवादों पर भी इस पुस्तक में चर्चा की गई है। इन दोनों कवियों की विश्व-दृष्टियों के अन्तर को रेखांकित करते हुए उनके आध्यात्मिक विचारों के बदले सामाजिक विचारों को प्राथमिकता दी गई है। इस पुस्तक में एक तरह से भक्तिकाव्य की आलोचना के माध्यम से हिन्दी आलोचना का इतिहास भी प्रस्तुत किया गया है।

समग्रतः इस पुस्तक में लेखक ने न केवल परिश्रम, सूझबूझ और आलोचकीय विवेक का परिचय दिया है, बल्कि मूल्यों की टकराहट और मूल्यांकनों के द्वन्द्व में उसने अपना स्वतंत्र विवेक नहीं खोया है। इसीलिए लेखक के निष्कर्षों से उसके निर्णय की क्षमता भी प्रकट होती है। निश्चय ही पुस्तक की प्रस्तुति स्तरीय, भाषा विषयानुकूल, प्रवाहपूर्ण और परिमार्जित है।

—डॉ. विश्वम्भरनाथ उपाध्याय

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2001
Edition Year 2024, Ed. 2nd
Pages 160p
Price ₹495.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 2.5
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Author: Rustam Roy

रुस्तम राय

रुस्तम राय का जन्म 7 जनवरी, 1963 को बिहार के सारण जिले के बनपुरा गाँव में हुआ। उन्होंने बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से एम.ए. (हिन्दी) किया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से एम.फिल. और पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। राष्ट्रीय मेधा छात्रवृत्ति एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वरिष्ठ अनुसंधान फेलोशिप से सम्मानित।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—प्रतिबन्धित हिन्दी साहित्य (दो खंडों में), मेघालय की लोककथाएँ, हिन्दी आलोचना और भक्तिकाव्य। इनके अतिरिक्त विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक लेख, शोध-पत्र एवं समीक्षाएँ प्रकाशित हैं।

ई-मेल : [email protected]

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