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Har Qissa Adhoora Hai-Paper Back

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हिन्दी ग़ज़ल अब एक सक्षम विधा बन चुकी है। मौजूदा भारतीय समाज के अनुभव-विस्तार में अलग-अलग जगहों पर अनेक शायर हैं जो उर्दू की इस लोकप्रिय विधा को अपने ढंग से बरत रहे हैं। कहीं उर्दू शब्दों की बहुतायत है, कहीं खड़ी बोली के शब्दों के प्रयोग हैं, तो कहीं आमफ़हम ज़बान में ज़िन्दगी के तजुर्बों की अक्कासी की जा रही है।

राज कुमार सिंह की ग़ज़लें सबकी समझ में आनेवाली शब्दावली में बिलकुल आम मुहावरे को ग़ज़ल में बाँधने की कोशिशें हैं। वे रोज़मर्रा जीवन के अनुभवों और संवेदनाओं को ग़ज़ल के फ़ॉर्म में ऐसे पिरो देते हैं कि पढ़ते हुए पता ही नहीं चलता कि आप ज़िन्दगी से किताब में कब आ गए, और कब किताब से वापस अपनी ज़िन्दगी में चले गए।

उनकी एक ग़ज़ल का मतला है ‘जितनी भी मिल जाए कम लगती है/देर से मिली ख़ुशी ग़म लगती है’, या फिर यह कि, ‘नज़र को फिर धोखे बार-बार हुए/यूँ जीने के बहाने हज़ार हुए’। ये पंक्तियाँ अपनी सहजता में बिना आपको आतंकित किए आपके साथ हो लेती हैं। यही शायर की क़लम की विशेषता है।

इस संग्रह में राज कुमार सिंह की उन्वान-शुदा ग़ज़लों के अलावा उनकी नज़्में भी दी जा रही हैं। लगता है जैसे ज़िन्दगी का जो ग़ज़लों से छूट रहा था, उसे उन्होंने नज़्मों में बड़ी महारत के साथ समेट लिया है। प्रेम और ‌बिछोह से प्रोफ़ेशनल जीवन की आधुनिक विडम्बनाओं तक को उन्होंने इन ग़ज़लों और नज़्मों में पिरो दिया है। एक शे’र और देखें–‘गाँव से हर बार झूठ कहता हूँ/बहुत अच्छे से हम शहर में हैं।‘ कहने की ज़रूरत नहीं कि यह किताब नए से नए पाठक को भी अपने जादू से सरशार करने की क़ुव्वत रखती है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2020
Edition Year 2020, Ed. 1st
Pages 150p
Price ₹199.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
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Raj Kumar Singh

Author: Raj Kumar Singh

राज कुमार सिंह

राज कुमार सिंह का जन्म 12 जनवरी, 1971 को उत्तर प्रदेश, इटावा (अब औरैया) के बिधूना तहसील में हुआ। उन्होंने मध्यकालीन एवं आधुनिक भारतीय इतिहास और पत्रकारिता में लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्रियाँ ली हैं। ‘नवभारत टाइम्स’ लखनऊ में बतौर राजनीतिक सम्पादक और ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ के वाराणसी और प्रयागराज संस्करण में बतौर स्थानीय सम्पादक कार्य किया है। ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ के ही लखनऊ संस्करण में उप-सम्पादक रहे हैं। ‘सहारा समय’, ‘न्यूज-24’ लखनऊ में ब्यूरो चीफ रहे और ‘वॉयस ऑफ़ इंडिया’ लखनऊ में भी ब्यूरो चीफ और फिर स्थानीय सम्पादक के रूप में काम किया। ‘न्यूज़ एक्सप्रेस’ लखनऊ में पहले स्टेट हेड फिर कॉर्डिनेटिंग एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में Newstrack.com में सलाहकार सम्पादक के पद पर कार्यरत हैं।

उनका एक ग़ज़ल-संग्रह ‘हर क़िस्सा अधूरा है’ प्रकाशित हो चुका है। इस संग्रह के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के ‘दुष्यंत कुमार सम्मान’ से सम्मानित किया गया है।

ई-मेल : [email protected]

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