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Ghanmala : Aacharya Kunwar Chandraprakash Singh Ke Geet-Hard Cover

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9789393603111
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'घनमाला' महाकवि कुँवर चन्द्रप्रकाश सिंह की काव्य-साधना का अन्तिम गीत-संग्रह है। इस गीत-संग्रह का प्रकाशन भारत की स्वतन्त्रता के अमृत महोत्सव वर्ष में किया जा रहा है। इसमें कुल 150 गीत संकलित हैं। इन 150 गीतों में 75 गीत प्रायः सन् 1978 ई. के बाद रचे गए हैं। इन गीतों में छायावाद युग के गीतों के वही भाव मिलेंगे जो छायावाद के उत्कर्ष काल में रचे गए गीतों में मिलते हैं। इसीलिए कुँवर जी को छायावाद का अन्तिम कवि माना है और उनके शताब्दी न्यासी कवि व्यक्तित्व में जीवन के अन्तिम क्षणों तक छायावादी भाव-भूमि को सन्निहित देखकर उन्हें छायावाद के उन्नायक कवि की उपाधि से अलंकृत किया है।
इस गीत-संग्रह को दो खंडों में विभक्त किया गया है। पहले खंड में सन् 1978 ई. के बाद रचे गीत संकलित हैं और दूसरे खंड में छायावाद के उत्कर्ष काल में रचे गए गीत हैं। इस संकलन के दूसरे खंड में छायावाद के उत्कर्षकाल के गीत इसलिए संकलित किए गए हैं, जिससे पाठक पहले खंड तथा दूसरे खंड के गीतों को पढ़कर यह समझ सकें कि कुँवर जी की काव्य-साधना में छायावाद की अनुभूति तथा अभिव्यक्ति का सम्पूर्ण काव्य-वैभव आदि से अन्त तक समान रूप से विद्यमान है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Shiv Mohan Singh
Publication Year 2022
Edition Year 2022, Ed. 1st
Pages 190p
Price ₹600.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
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Author: Kunwar Chandraprakash Singh

कुँवर चन्द्रप्रकाश सिंह

जन्म : 18 अक्टूबर सन् 1910, ग्राम- पैसिया, जिला सीतापुर।

शिक्षा : बी.ए. लखनऊ विश्वविद्यालय, एम.ए., तथा डी.लिट्. नागपुर विश्वविद्यालय से अर्जित किया।

गतिविधियाँ : अध्यक्ष, हिन्दी विभाग एवं वाइस प्रिंसिपल युवराजदत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लखीमपुर खीरी (1943-1958)। आचार्य एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, बड़ौदा विश्वविद्यालय, गुजरात (1958-1965 ) । वरिष्ठ आचार्य एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग तथा अधिष्ठाता, कला संकाय, जोधपुर विश्वविद्यालय, राजस्थान (1965-1969)। वरिष्ठ आचार्य एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग तथा अधिष्ठाता, कला संकाय, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, बिहार (1969- 1974), यू.जी.सी. के सहयोग से हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास में हिन्दीतर क्षेत्रों का योगदान । शीर्ष शोध योजना पर कार्य जनेस्मा महाविद्यालय, बाराबंकी (1974-1978)।

साहित्य-सेवा : काव्य, महाकाव्य, नाटक, बाल एकांकी, खोज ग्रन्थ, शोध एवं समालोचना ग्रन्थ, शोध साधना, सम्पादित ग्रन्थ तथा अनुदित ग्रन्थ प्रकाशित।

पुरस्कार: सर जार्ज लैम्बर्ट स्वर्णपदक विजेता।

निधन : 12 अक्टूबर 1997

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