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Garibnawaz

Author: Santosh Choubey
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Garibnawaz

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ये इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ हैं। यहाँ उत्तर-आधुनिक कहानी के इशारे हैं। ये पॉज़ि‍टिवली हल्की-फुल्की हैं और बे-बोझ एवं प्रसन्न हैं। ये बड़ी बात का आडम्बर नहीं रचती हैं और न फालतू की पीड़ा का स्वाँग भरती हैं। इन कहानियों से हिन्दी में उत्तर-कहानी की शुरुआत हुई मानी जा सकती है।

—सुधीश पचौरी

संतोष चौबे की कहानियाँ यथार्थ की गहनता और व्याप्ति में जाकर सत्य को आख्यान में रूपान्तरित करने का जतन करती हैं। इस प्रक्रिया में वे कहानी कहने के अनेक अनुशासनों को नकारती हैं और यूँ अपनी तरह के कथानुशासन एवं शिल्प की निर्मिति करती हैं। ‘ग़रीबनवाज़’ की अधिसंख्य कहानियों में साहित्य, कला से जुड़े चरित्र उपस्थित हैं लेकिन कहानियाँ महज़ यहाँ से उड़ान भरती हैं, अन्तत: वे आर्थिक उदारीकरण से उपजी मूल्यहीनता, लालच, कपटीपन और क्षरणशील आधुनिकता का प्रत्याख्यान करती हैं। इन चीज़ों में इतनी निष्ठुरता है कि समाज की तमाम सुन्दरताएँ नष्ट हो रही हैं। संतोष चौबे की कहानियाँ पूँजी, तकनीक एवं ताक़त के सहमेल से उपजी विरूपता से मुठभेड़ करती अन्तत: जीवन के सुन्दरतम के पक्ष में खड़ी होती हैं।

—अखिलेश 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 272p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2
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Santosh Choubey

Author: Santosh Choubey

संतोष चौबे
संतोष चौबे का जन्म 22 सितम्बर, 1955 को मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में हुआ। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—हल्के रंग की कमीज़, रेस्त्राँ में दोपहर, नौ बिन्दुओं का खेल, बीच प्रेम में गाँधी, मगर शेक्सपियर को याद रखना, ग़रीबनवाज़ (कहानी-संग्रह); राग केदार, क्या पता कॉमरेड मोहन, जलतरंग, सपनों की दुनिया में ब्लैक होल (उपन्यास); कहीं और सच होंगे सपने, कोना धरती का, इस अ-कवि समय में, घर बाहर (कविता-संग्रह); कला की संगत, अपने समय में, परम्परा और आधुनिकता, कहानी का रास्ता (आलोचना)। उन्होंने कथाकार वनमाली पर केन्द्रित दो खंडों में वनमाली समग्र के साथ कई और पुस्तकों का सम्पादन किया है। छह खंडों में ‘कथा मध्यप्रदेश’ तथा अठारह खंडों में ‘कथादेश’ के वे सम्पादक व ‘विज्ञान कथाकोश’ तथा ‘रंगसंवाद’ पत्रिका के प्रधान सम्पादक हैं। उन्होंने 2019 में हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रसार के उद्देश्य से अन्तरराष्ट्रीय ‘विश्वरंग’ की भोपाल से शुरुआत की।

वर्तमान में वे डॉ. सी.वी. रामन् विश्वविद्यालय तथा रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के चांसलर तथा विश्वरंग के निदेशक हैं।

उन्हें मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् के ‘दुष्यन्त कुमार पुरस्कार’, ‘स्पन्दन आलोचना सम्मान’, ‘शैलेश मटियानी पुरस्कार’, ‘अन्तरराष्ट्रीय वैली ऑफ वर्ड्स’ सहित कई अन्य सम्मान प्राप्त हैं।

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