Ek Zameen Apni

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Author: Chitra Mudgal
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Ek Zameen Apni
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विज्ञापन की चकाचौंध दुनिया में जितना हिस्सा पूँजी का है, शायद उससे कम हिस्सेदारी स्त्री की नहीं है। इस नए सत्ता-प्रतिष्ठान में स्त्री अपनी देह और प्रकृति के माध्यम से बाज़ार के सन्देश को ही उपभोक्ता तक नहीं पहुँचाती, बल्कि इस उद्योग में पर्दे के पीछे एक बड़ी ‘वर्क फ़ोर्स’ भी स्त्रिायों से ही बनती है। ‘एक ज़मीन अपनी’ विज्ञापन की उस दुनिया की कहानी भी है जहाँ समाज की इच्छाओं को पैना करने के औज़ार तैयार किए जाते हैं और स्त्री के उस संघर्ष की भी जो वह इस दुनिया में अपनी रचनात्मक क्षमता की पहचान अर्जित करने और सिर्फ़ देह-भर न रहने के लिए करती है। आठवें दशक की बहुचर्चित कथाकार चित्रा मुद्गल ने इस उपन्यास में उसके इस संघर्ष को निष्पक्षता के साथ उकेरते हुए इस बात का भी पूरा ध्यान रखा है कि वे सवाल भी अछूते न रह जाएँ जो विज्ञापन-जगत की अपेक्षाकृत नई संघर्ष-भूमि में नारी-स्वातंत्र्य को लेकर उठते हैं, उठ सकते हैं।

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 1999
Edition Year 2019, Ed. 5th
Pages 224P
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Editorial Review

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Chitra Mudgal

Author: Chitra Mudgal

चित्रा मुद्गल

 

जन्म : 10 दिसम्बर, 1943 

आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘आवां’ (आठ भारतीय भाषाओं में अनूदित), ‘गिलिगडु’, ‘एक ज़मीन अपनी’, ‘पोस्ट बॉक्स नम्बर 203, नाला सोपारा’ आदि (उपन्यास); ‘इस हमाम में’, ‘चेहरे’, ‘लपटें’, ‘आदि-अनादि’ (तीन खंडों में), ‘जगदम्बा बाबू गाँव आ रहे हैं’, ‘भूख’, ‘ज़हर ठहरा हुआ’, ‘लाक्षागृह’, ‘अपनी वापसी’, ‘ग्यारह लम्बी कहानियाँ’, ‘जिनावर’, ‘मामला आगे बढ़ेगा अभी’, ‘केंचुल’ आदि (कहानी); ‘तहख़ानों में बन्द अक्स’ (कथात्मक रिपोर्ताज); ‘जीवक’, ‘माधवी कन्नगी’ और ‘मणिमेखलयी’ (तीन बाल उपन्यास); ‘दूर के ढोल’, ‘सूझ-बूझ’, ‘देश-देश की लोककथाएँ’ (बाल कथा-संग्रह); ‘बयार उनकी मुट्ठी में’ (लेख); ‘सद्गति तथा अन्य नाटक’, ‘पंच परमेश्वर तथा अन्य नाटक’, ‘बूढ़ी काकी तथा अन्य नाटक’ (नाट्य-रूपान्तर)। 

आपने अनेक पुस्तकों का सम्पादन किया है। दूरदर्शन के लिए टेलीफ़‍िल्म ‘वारिस’ का निर्माण किया है। प्रसिद्ध कहानियों पर आधारित ‘एक कहानी’, ‘मंझधार’, ‘रिश्ते’ सरीखे धारावाहिकों में आपकी कई कहानियाँ सम्मिलित हुई हैं। आप प्रसार भारती की बोर्ड मेम्बर और उसी की इंडियन क्लासिक कोर कमिटी की अध्यक्ष रह चुकी हैं। आप 42वें और 68वें नेशनल अवार्ड की ज्यूरी सदस्य रही हैं। 

आपका उपन्यास ‘आवां’ बिड़ला फ़ाउंडेशन के ‘व्यास सम्मान’ से सम्मानित है। आप ‘इन्दु शर्मा कथा सम्मान’ (लन्दन), ‘पुश्किन सम्मान’ (रूस), ‘साहित्य सम्मान’ (हिन्दी अकादमी, दिल्ली), ‘अवन्ती बाई सम्मान’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’ और ‘वीरसिंह देव सम्मान’ के साथ ही सामाजिक कार्यों के लिए ‘विदुला सम्मान’ से भी सम्मानित की जा चुकी हैं।

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