Facebook Pixel

Chalo Kalkatta-Paper Back

Special Price ₹144.00 Regular Price ₹160.00
10% Off
In stock
SKU
9788180316999
- +
Share:
Codicon

मैंने पाँच उपन्यासों के द्वारा भारतवर्ष के इतिहास का परिक्रमण शुरू किया था। 1757 ई. में जिस दिन अंग्रेज़ों ने पहले-पहल भारतवर्ष में पाँव रखा था, उसी दिन शुरू हुआ यह परिक्रमण। ‘बेगम मेरी विश्वास’ इस परिक्रमण का सूत्रपात है। उसके पश्चात् ‘साहब बीबी गुलाम’, ‘खरीदी कौड़ियों के मोल’, ‘इकाई दहाई सैकड़ा' के साथ बीसवीं सदी के छठे दशक में जब भारत की पूर्वी सीमा चीनी आक्रमण से आक्रान्त थी, यह परिक्रमण सम्पूर्ण हुआ। उसके बाद स्वाधीनोत्तर युग के अति आधुनिक विक्षुब्ध बंगाल की राजधानी का चित्र हैं—‘चलो कलकत्ता’। बांग्ला में पहली बार जब यह पुस्तक प्रकाशित हुई, यहाँ कांग्रेस सरकार सत्तारूढ़ थी।

पाठक अगर इन पुस्तकों को कालानुक्रमिक भाव से पढ़ें, तो अर्थ के रस-ग्रहण में उन्हें विशेष सुविधा होगी। 

—बिमल मित्र

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2012
Edition Year 2019, Ed. 2nd
Pages 144p
Price ₹160.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 13.5 X 0.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Chalo Kalkatta-Paper Back
Your Rating
Bimal Mitra

Author: Bimal Mitra

बिमल मित्र

बांग्ला के प्रसिद्ध लेखक।

जन्म : 18 मार्च, 1912 को कोलकाता में।

शिक्षा : कोलकाता विश्वविद्यालय से एम.ए.।

अनेक कहानियों और लगभग 70 उपन्यासों के रचयिता बिमल मित्र बांग्लाभाषी समाज के अलावा हिन्दी व तमिल समाज में भी समान रूप से लोकप्रिय हैं।

प्रमुख कृतियाँ : ‘अन्यरूप’, ‘साहब बीबी गुलाम’, ‘मैं’, ‘राजाबदल’, ‘परस्त्री’, ‘इकाई दहाई सैकड़ा’, ‘खरीदी कौड़ियों के मोल’, ‘मुजरिम हाजिर’, ‘पति परम गुरु’, ‘बेगम मेरी विश्वास’, ‘चलो कलकत्ता’ (उपन्यास); ‘पुतुल दीदी’, ‘रानी साहिबा’ (कहानी-संग्रह); ‘कन्यापक्ष’ (रेखाचित्र)।

निधन : 2 दिसम्बर, 1991

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top