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Bahudha aur 9/11 ke baad ki dunia-Hard Cover

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इधर आतंकवाद और पुनरुत्थानवाद के उदय के कारण वैश्विक राजनीति में कुछ अहम परिवर्तन आए हैं। ये अभूतपूर्व चुनौतियाँ विश्व के नेताओं से एक नई, साहसी और कल्पनाशील राजनीति की माँग कर रही हैं। शान्ति की सदियों पुरानी तकनीकों से ऊपर उठने और विमर्श की हमारी भाषा की पुनर्रचना करने की ज़रूरत को रेखांकित करते हुए यह पुस्तक ‘बहुधा’ की अवधारणा को प्रस्तुत करती है; ‘बहुधा’—यानी एक शाश्वत सचाई, एक सातत्य; शान्तिपूर्ण जीवन और सौहार्द का संवाद। यह अवधारणा बहुजातीय समाजों और बहुवाद के अन्तर को बताती है, वैचारिक आदान-प्रदान की गुंजाइश देती है और सामूहिक कल्याण की समझ को प्रोत्साहित करती है।

पुस्तक को पाँच भागों में विभाजित किया गया है। पहले भाग में 1989 से 2001 की अवधि में घटी घटनाओं और विभिन्न देशों, संस्कृतियों और अन्तरराष्ट्रीय शान्ति पर पड़े उनके प्रभावों पर विचार किया गया है। मसलन—बर्लिन की दीवार का गिरना, हांगकांग का चीन में जाना और सितम्बर 11 को अमेरिका में हुआ हमला। दूसरे भाग में वेदों और पुराणों के उदाहरणों और अशोक, कबीर, गुरु नानक, अकबर व महात्मा गांधी की नीतियों के विश्लेषण के द्वारा बहुवादी चुनौतियों से निबटने के भारतीय अनुभवों को परखा गया है।

आगे के भागों में लेखक ने ‘बहुधा’ को सामूहिक सौहार्द की एक नीति के रूप में रेखांकित करते हुए विश्वस्तर पर इस दृष्टिकोण के अनुकरण पर विचार किया है। एक सद्भावनापूर्ण समाज की रचना के लिए लेखक शिक्षा और धर्म की भूमिका को केन्द्रीय मानते हैं और वैश्विक विवादों को हल करने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ को शक्तिशाली बनाने की वकालत करते हैं।

लेखक की मान्यता है कि आतंकवाद का जवाब मानवाधिकारों के सम्मान और विभिन्न संस्कृतियों और मूल्य-व्यवस्थाओं के सम्मान में छिपा है। शान्तिपूर्ण विश्व के निर्माण के लिए, आवश्यक संवाद-प्रक्रिया को आरम्भ करने के लिए यह ज़रूरी है।

कई-कई विषय-क्षेत्रों में एक साथ विचरण करनेवाली यह कृति विद्यार्थियों, विद्वानों और इतिहास, दर्शन, राजनीति तथा अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों के शोधार्थियों के लिए समान रूप से रुचिकर साबित होगी।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2009
Edition Year 2009, Ed. 1st
Pages 419p
Price ₹550.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 3
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Balmeeki Prasad Singh

Author: Balmeeki Prasad Singh

बाल्मीकि प्रसाद सिंह

जन्म : 1 जनवरी, 1942

सिक्किम के राज्यपाल रहे बाल्मीकि प्रसाद सिंह एक मान्य विद्वान, विचारक और प्रशासक हैं। आपको ‘जवाहरलाल फ़ेलोशिप’ (1982-84), ‘क्वीन एलिज़ाबेथ फ़ेलोशिप’ (1989-90) और ‘महात्मा गांधी फ़ेलोशिप’ सहित अनेक सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें विशिष्ट प्रशासनिक सेवा के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘गुलजारी लाल नंदा अवार्ड’ (1998) और माननीय दलाई लामा द्वारा ‘मैन ऑफ़ लैटर्स अवार्ड’ (2008) भी शामिल हैं।

विगत दशकों में आप अतिरिक्त सचिव (पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, 1993-95), संस्कृति सचिव (1995-97) और गृह सचिव (1997-99) जैसे विभिन्न महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। 1999-2002 की अवधि में आप विश्वबैंक में कार्यकारी निदेशक और राजदूत भी रहे।

आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं : ‘द प्रॉब्लम ऑफ़ चेंज : ए स्टडी ऑफ़ नॉर्थ ईस्ट इंडिया’, ‘इंडिया’ज़ कल्चर : द स्टेट, द आट् र्स एंड बियॉन्‍ड’ (जो हिन्‍दी में ‘संस्कृति : राज्य, कलाएँ और उनसे परे’ शीर्षक से प्रकाशित), ‘बहुधा एंड द पोस्‍ट 9/11 वर्ल्‍ड विथ ए फ़ॉरवर्ल्‍ड बाइ हिज होलीनेस द दलाई लामा’, ‘द इंडियन नेशनल कांग्रेस एंड कल्‍चरल रिनेसन्‍स’, ‘थ्रेड
वोवन : आयडियल्‍स, प्रिंसिपल्‍स एंड एडमिनिस्‍ट्रेशन’, ‘आवर इंडिया’। इनके अलावा ‘द मिलेनियम बुक ऑन न्यू दिल्ली’ (2001) का सम्पादन किया है।

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