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Ayurvedic Bhojan Sanskriti-Hard Cover

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9788183615815
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आयुर्वेद आयु का विज्ञान है जो जीवन के प्रत्येक पहलू से जुड़ा है। ‘आयुर्वेदिक भोजन’ आयुर्वेदिक जीवन-शैली का अंग है और भोजन बनाने के अन्य अंगों को अपनाए बिना यह प्रयास अपूर्ण है।

आयुर्वेदिक भोजन क्या है? आयुर्वेदिक भोजन संस्कृति के प्रमुख तत्त्व, बुनियादी ज्ञान एवं

आधारभूत बातें, रसों का व्यावहारिक स्वरूप, भोजन बनाने की मूल वस्तुओं का संकलन, भोजन के छह आयाम तथा आयुर्वेदिक भोज्य व्यंजन (नाश्ते के व्यंजन, प्रमुख भोजन, सूप, सहायक खाद्य पदार्थ आदि) पर सम्पूर्ण सामग्री के अलावा खाद्य पदार्थों, जड़ी-बूटियों और मसालों की पूर्ण जानकारी।

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. विनोद कुमार वर्मा के वर्षों के शोध और परिश्रम का निष्कर्ष यह पुस्तक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए आयुर्वेदिक भोजन बनाने और खाने की कला के विषय में सम्पूर्ण जानकारी देती है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Editor Not Selected
Publication Year 2013
Edition Year 2024, Ed. 3rd
Pages 199p
Price ₹695.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Vinod Verma

Author: Vinod Verma

विनोद वर्मा

डॉ. वर्मा का जन्म और पालन-पोषण एक ऐसे परिवार में हुआ जिसके हर रोज़ के क्रियाकलाप में ‘योग’ और ‘आयुर्वेद’ की बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने अपने पिता से यौगिक प्रक्रियाओं की शिक्षा प्राप्त की और अपनी दादी माँ द्वारा जीवन में आयुर्वेद को आत्मसात् हुआ। डॉ. वर्मा की दादी माँ को स्त्रियों और बच्चों के उपचार की स्वाभाविक योग्यता प्राप्त थी। पारिवारिक परम्परा के बावजूद डॉ. वर्मा ने आधुनिक चिकित्साशास्त्र के अध्ययन का निश्चय किया और डॉक्टर की दो उपाधियाँ अर्जित कीं—पंजाब विश्वविद्यालय से प्रजनन जीवविज्ञान (Reproduction Biology) में और पेरिस की Universite de Pierre et Marie Curie से तंत्रिका जीवविज्ञान (Neurobiology) में। तंत्रिका जीवविज्ञान के क्षेत्र में डॉ. वर्मा ने उन्नतिशील शोधकार्य किया—पहले National Institute of Health, Bethesda (USA) में और फिर Max-Planck Institute, Germany में। जर्मनी की एक औषधीय कम्पनी में चिकित्सा सम्बन्धी शोध के दौरान डॉ. वर्मा ने स्पष्ट अनुभव किया कि निरोग अवधान सम्बन्धी नवीनतम दृष्टिकोण विखंडित है, फिर भी हम लोग स्वास्थ्य-सम्पोषण को छोड़कर केवल बीमारियों के इलाज पर ही अपने सारे साधन और प्रयास लगाए जा रहे हैं। इस उद्देश्य के लिए डॉ. वर्मा ने ‘Now’ (The New Way Health Organization) की स्थापना की, ताकि इसके द्वारा वह स्वास्थ्यप्रद पवित्र जीवन-शैली, स्वास्थ्य की देखभाल के लिए निरोधी उपायों और दूसरे स्वावलम्बी तरीक़ों के विषय में जानकारी लोगों तक पहुँचा सकें।

पिछले कई वर्षों से डॉ. वर्मा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के आचार्य प्रियव्रत शर्मा के साथ प्राचीन गुरु-शिष्य परम्परा के अनुसार आयुर्वेदिक ग्रन्थों का अध्ययन कर रही हैं। इसके अलावा वह मानव जातीय और लोक साहित्यिक आयुर्वेदिक परम्परा के क्षेत्र में शोध करती रही हैं ताकि साधारण आयुर्वेदिक उपचार के घरेलू नुस्खों का पता लगाया जा सके।

डॉ. वर्मा के अनेक वैज्ञानिक शोध-लेख अन्तरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आयुर्वेद एवं योग आदि पर उनके पाँच ग्रन्थ भी विभिन्न यूरोपीय भाषाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

डॉ. वर्मा हर वर्ष कुछ महीने विदेश में बिताती हैं जहाँ आयुर्वेद और योग द्वारा स्वास्थ्य तथा दीर्घायु जैसे विषयों पर उनके भाषण, कार्य-शिविर तथा अन्य कार्यक्रम अत्यन्त लोकप्रिय हैं।

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