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Karyakshamta Ke Liye Aayurveda Aur Yog

Author: Vinod Verma
Translator: Bhaskar Juyal
Edition: 2025, Ed. 4th
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
As low as ₹269.10 Regular Price ₹299.00
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Karyakshamta Ke Liye Aayurveda Aur Yog

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आयुर्वेद और योग का विस्तार आज विश्व भर में हो रहा है। आयुर्वेद और योग वह ज्ञान और विज्ञान है जिसका जीवन के साथ सम्बन्ध है। यह पुस्तक आयुर्वेद, योग और ध्यान के तत्त्वों से रची परम्परागत भारतीय स्वास्थ्य चेतना को समकालीन जीवन की दिनोंदिन जटिल होती जा रही शैली से जोड़ने का अनूठा प्रयास है। इस पुस्तक से आप अपने को भोज्य पदार्थों और मसालों से संतुलित करने की प्रविधियां भी जानेंगे।

डॉ. विनोद वर्मा के वर्षों के शोध और परिश्रम का निष्कर्ष यह पुस्तक स्वास्थ्य की

देख-भाल के लिए निरोधी उपायों और दूसरे स्वावलंबी तरीकों के विषय में सम्पूर्ण जानकारी देती है। लेखिका की विदेशों में आयुर्वेद  शिक्षा, आयुर्वेद और योग का गहन अध्ययन तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुसंधान और अनुभव इस पुस्तक को महत्त्वपूर्ण कृति बनाते हैं।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Bhaskar Juyal
Editor Not Selected
Publication Year 2000
Edition Year 2025, Ed. 4th
Pages 186p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1.5
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Vinod Verma

Author: Vinod Verma

विनोद वर्मा

डॉ. वर्मा का जन्म और पालन-पोषण एक ऐसे परिवार में हुआ जिसके हर रोज़ के क्रियाकलाप में ‘योग’ और ‘आयुर्वेद’ की बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने अपने पिता से यौगिक प्रक्रियाओं की शिक्षा प्राप्त की और अपनी दादी माँ द्वारा जीवन में आयुर्वेद को आत्मसात् हुआ। डॉ. वर्मा की दादी माँ को स्त्रियों और बच्चों के उपचार की स्वाभाविक योग्यता प्राप्त थी। पारिवारिक परम्परा के बावजूद डॉ. वर्मा ने आधुनिक चिकित्साशास्त्र के अध्ययन का निश्चय किया और डॉक्टर की दो उपाधियाँ अर्जित कीं—पंजाब विश्वविद्यालय से प्रजनन जीवविज्ञान (Reproduction Biology) में और पेरिस की Universite de Pierre et Marie Curie से तंत्रिका जीवविज्ञान (Neurobiology) में। तंत्रिका जीवविज्ञान के क्षेत्र में डॉ. वर्मा ने उन्नतिशील शोधकार्य किया—पहले National Institute of Health, Bethesda (USA) में और फिर Max-Planck Institute, Germany में। जर्मनी की एक औषधीय कम्पनी में चिकित्सा सम्बन्धी शोध के दौरान डॉ. वर्मा ने स्पष्ट अनुभव किया कि निरोग अवधान सम्बन्धी नवीनतम दृष्टिकोण विखंडित है, फिर भी हम लोग स्वास्थ्य-सम्पोषण को छोड़कर केवल बीमारियों के इलाज पर ही अपने सारे साधन और प्रयास लगाए जा रहे हैं। इस उद्देश्य के लिए डॉ. वर्मा ने ‘Now’ (The New Way Health Organization) की स्थापना की, ताकि इसके द्वारा वह स्वास्थ्यप्रद पवित्र जीवन-शैली, स्वास्थ्य की देखभाल के लिए निरोधी उपायों और दूसरे स्वावलम्बी तरीक़ों के विषय में जानकारी लोगों तक पहुँचा सकें।

पिछले कई वर्षों से डॉ. वर्मा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के आचार्य प्रियव्रत शर्मा के साथ प्राचीन गुरु-शिष्य परम्परा के अनुसार आयुर्वेदिक ग्रन्थों का अध्ययन कर रही हैं। इसके अलावा वह मानव जातीय और लोक साहित्यिक आयुर्वेदिक परम्परा के क्षेत्र में शोध करती रही हैं ताकि साधारण आयुर्वेदिक उपचार के घरेलू नुस्खों का पता लगाया जा सके।

डॉ. वर्मा के अनेक वैज्ञानिक शोध-लेख अन्तरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आयुर्वेद एवं योग आदि पर उनके पाँच ग्रन्थ भी विभिन्न यूरोपीय भाषाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

डॉ. वर्मा हर वर्ष कुछ महीने विदेश में बिताती हैं जहाँ आयुर्वेद और योग द्वारा स्वास्थ्य तथा दीर्घायु जैसे विषयों पर उनके भाषण, कार्य-शिविर तथा अन्य कार्यक्रम अत्यन्त लोकप्रिय हैं।

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