Ateet Rag

Memoirs
Author: Nand Chaturvedi
You Save 20%
Out of stock
Only %1 left
SKU
Ateet Rag

ये वृत्तान्त किसी भी व्यक्ति के जीवन का विशद ब्योरा नहीं है; आदि से अन्त तक उसे जानने का या उसके जीवन-आवेगों में रहस्यों को किसी मनोचिकित्सक की तरह देखने का। यह सिर्फ़ ज़िन्दगी के उस हिस्से को देखने की कोशिश है जो समाज से जुड़ी है और ‘सामाजिकता’ का बहुमूल्य हिस्सा है।

‘अतीत राग’ समान विचार वाले पड़ोसियों का इलाक़ा है। इसके ज़्यादातर पड़ोसी लेखक के समाजवादी साथी और साहित्यकार मित्र हैं जो शोषणमुक्त समाज-रचना के लिए प्रतिबद्ध
हैं।

‘भारतीय समाजवाद’ आज़ादी के बाद वाले दिनों में अपनी थोड़ी-सी क्रान्तिकारी पहचान बनाकर विलुप्त हुआ काल-खंड है। बदलाव के इस काल-खंड में कोई विरल सिद्धान्तकार नहीं मिला; जो थे वे जयप्रकाश नारायण, डॉ. राममनोहर लोहिया, आचार्य नरेन्द्र देव, अशोक मेहता आदि थे। वे कांग्रेस की ‘ढीली चाल’ और पूँजीपतियों के प्रति अनुकूल आचरण से सैद्धान्तिक मतभेद रखते थे। लेकिन पार्टी के लिए जैसे संगठित नेतृत्व और बदलाव की दिशा चाहिए थी, उसका विश्वसनीय घोषणा-पत्र तैयार करने में वे कामयाब नहीं हुए।

एक अर्थ में समाजवादी पार्टी समाप्त हो गई थी लेकिन एक अदृश्य समाजवादी पार्टी मन में बनी थी, वह बनी रही। वे जो सिर्फ़ पार्टी के उसूलों के लिए नहीं, ज़िन्दगी के गम्भीर उसूलों के लिए समर्पित थे, अडिग रहे, सब जैसे रिश्तेदार हो गए। वे बड़े लोग नहीं थे। कोई स्टेशन का कुली था, कोई सड़क के किनारे चाय बनाता था या शहर में पार्टी चलाता था, हीरालाल जैन थे या राजेन्द्र जी, नरेन्द्र जी थे या जयप्रकाश नारायण या फिर राममनोहर लोहिया थे; सब स्मृतियों में बस गए और उनकी ‘करनी की चारुता’ समृद्धि-सम्पदा की ललक को दोनों हाथों से उलीचकर फेंकने के साहस को मैंने देखा।

जो देखा, उसमें से वही चुना, जो ‘लोकार्पित’ था और जो लोक-रचना का भविष्य हो सकता था। वह विशेष, जो उन्होंने जीवन से मृत्यु तक चुना। मैंने भी उनकी स्मृति में उसे ही रेखांकित किया है।

 —इसी पुस्तक से

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2009
Edition Year 2021, Ed. 2nd
Pages 200p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2
Write Your Own Review
You're reviewing:Ateet Rag
Your Rating

Editorial Review

It is a long established fact that a reader will be distracted by the readable content of a page when looking at its layout. The point of using Lorem Ipsum is that it has a more-or-less normal distribution of letters, as opposed to using 'Content here

Nand Chaturvedi

Author: Nand Chaturvedi

नन्द चतुर्वेदी

जन्म : 21 अप्रैल, 1923 को रावजी का पीपत्या (पहले राजस्थान अब मध्य प्रदेश में) में।

शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), बी.टी.।

1950 से 1955 तक गोविन्दराम सेकसरिया टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में प्राध्यापक; 1956 से 1981 तक विद्याभवन रूरल इंस्टीट्यूट में हिन्दी प्राध्यापक।

लेखन : ब्रजभाषा में कविता लिखना प्रारम्भ किया। कविता के लिए पहला पुरस्कार बारह वर्ष की आयु में। राष्ट्र की स्वाधीनता और सामाजिक-आर्थिक ग़ैर-बराबरियों को रेखांकित करते हुए घनाक्षरी, सवैया, पद, दोहा पदों में रचनाएँ। हिन्दी (खड़ी बोली) में चतुष्पदियों, गीत से लगाकर अतुकान्त-आधुनिक कविताओं का सृजन। 'सप्तकिरण’, 'राजस्थान के कवि’ (भाग—1), 'इस बार’ (अध्यापकों का कविता-संग्रह), 'जयहिन्द’ (समाजवादी साप्ताहिक) से लेकर 'जनमन’, 'जन-शिक्षण’, 'मधुमती’ तथा चिन्तन-प्रधान साहित्यिक पत्रिका 'बिन्दु’ का सम्पादन। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की उच्च कक्षाओं के लिए कहानी तथा गद्य की अन्य विधाओं का संग्रह-सम्पादन। राजस्थान साहित्य अकादेमी के लिए प्रान्त के प्रख्यात रचनाकारों पर 'मोनोग्राफ़’ लेखन।

प्रकाशित कृतियाँ : ‘आशा बलवती है राजन्’, ‘गा हमारी ज़िन्दगी कुछ गा’, ‘उत्सव का निर्मम समय’, ‘जहाँ उजाले की एक रेखा खींची है’, ‘यह समय मामूली नहीं’, ‘ईमानदार दुनिया के लिए’, ‘वे सोए तो नहीं होंगे’ (कविता-संग्रह); ‘शब्द संसार की यायावरी’, ‘यह हमारा समय’, ‘अतीत राग’ (गद्य); ‘सुधीन्द्र’ (व्यक्ति और कविता) राजस्थान साहित्य अकादेमी की पुरोधा शृंखला के अन्तर्गत प्रकाशित।

सम्मान : ‘मीराँ पुरस्कार’—राजस्थान साहित्य अकादेमी का सर्वोच्च पुरस्कार; ‘बिहारी पुरस्कार’—के.के. बिड़ला फ़ाउंडेशन; ‘लोकमंगल पुरस्कार’, मुम्बई; ‘अखिल भारतीय आकाशवाणी सम्मान’ (श्रेष्ठ वार्ताकार) आदि।

यात्रा : छठे विश्व हिन्दी सम्मेलन, लन्दन में राजस्थान राज्य द्वारा भेजे गए प्रतिनिधि मंडल के सदस्य।

मृत्यु : 25 दिसम्बर, 2014

Read More
Books by this Author

Back to Top