अश्वत्थामा के माथे पर के सदा बहते घाव की तरह मनुष्य की पेशानी पर भी प्रकृति ने एकाकीपन का एक ज़ख्‍़म बड़ा है। इस ज़ख़्म को भरने के सफल-असफल प्रयासों का नाम जीवन है। सामाजिक क्षेत्र में, महत्‍त्‍वाकांक्षा का दामन थाम, कुछ कर गुज़रने की ललक इस घाव को किन्हीं अंशों में भरने में सहायक होती है। परन्तु मन के एकाकीपन का ज़ख्‍़म सदा रिसता रहता है। पारसी पृष्ठभूमि पर लिखे इस उपन्यास की नायिका खोर्शेद की छोटी-सी दुनिया कमज़ोर दिमाग़ माँ, प्यारे पेसी अंकल, आया मेरी तथा इब्राहीम पॉववाले तक सीमित है, जहाँ प्रेम एवं विश्वास से घिरी, वह अपने छोटे-छोटे सुखों को लेकर सन्तोष से जी रही है। जिस स्कूल में वह पढ़ी है, वहीं नौकरी पा जाना उसके सुख की पराकाष्ठा है। यहाँ उसका सम्पर्क होता है दो भाइयों से। केखुशरू यानी केकी, जो दफ़्तर में उसका बॉस है, और मीनोचेहेर या मीनू जो उसकी इच्छा, आकांक्षाओं का केन्द्र बिन्दु है। वक़्त आने पर उसे अपने जन्म की हक़ीक़त से अवगत कराया जाता है। यह जानकारी उसकी छोटी-सी दुनिया को क्षत-विक्षत कर देती है। जब वह कुछ सँभलती है तो पाती है कि अब न उसके पास कोई भूतकाल बचा है, न आगे कहीं भविष्य ही दिखाई देता है। पेसी अंकल, आया मेरी, इब्राहीम पॉववाला, सभी का साथ छूट जाता है। माँ को वह स्वयं अलग करती है। फिर एक दौर आता है जिसमें ज़ि‍द और हिम्मत के बल पर वह नियति द्वारा, अपने हिस्से में बाँटी गई, इस असमानबाजी में, बाहरी पहलू पर तो विजय हासिल कर लेती है, पर आन्‍तरि‍क पहलू पर, प्राप्त अनुभव को ही लक्ष्य मानकर उसे अन्तत: समझौता करने के लिए विवश होना पड़ता है।

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Language Hindi
Format Hard Back
Edition Year 1996
Pages 165p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Author: Hemangini A. Ranade

हेमांगिनी अ. रानडे

 

जन्म : गुजरात के एक मुस्लिम परिवार में। शिक्षा-दीक्षा मुम्बई तथा इन्दौर में। आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक। संगीतज्ञ डॉ. अशोक दा रानडे से सन् 1967 में विवाह। कॉलेज जीवन से ही आकाशवाणी से संलग्न। पहले इन्दौर, तत्पश्चात् आकाशवाणी मुम्बई में। आकाशवाणी में नाट्य-स्वर के रूप में कार्य। महिलाओं तथा बालकों के हिन्‍दी कार्यक्रमों का संचालन तथा प्रस्तुतिकरण।

हिन्‍दी, गुजराती, अंग्रेज़ी कार्यक्रमों में सहयोग। कई रेडियो-नाटकों का निर्देशन, लेखन और प्रस्तुतिकरण एवं उनमें अभिनय। कई नाटकों, वार्ताओं, कथाओं, रूपकों आदि का लेखन तथा अन्य भाषाओं की रचनाओं का हिन्‍दी में अनुवाद। सन् 1992 में सेवानिवृत्त।

‘सारिका’, ‘धर्मयुग’, ‘नवभारत टाइम्स’ (मुम्बई), ‘सबरंग’, ‘आजकल’ आदि पत्रिकाओं में कहानियों का प्रकाशन। ‘धर्मयुग’ में नारी-समस्याओं पर लेखन। ‘नवनीत समर्पण’ में गुजराती भाषा में कथा-कहानियाँ प्रकाशित। बच्‍चों के लिए एन.बी.टी. के पाठक-मंच में कहानी-लेखन। एन.ए.बी. द्वारा ‘बोलती पुस्तकें’ में दृष्टिहीनों के लिए विभिन्न भाषाओं की नियमित वाचिका।

पहला उपन्यास ‘अनुभव’ राजकमल से सन् 1996 में प्रकाशित।

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