Antarang Bahirang

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Antarang Bahirang
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रंगमंच के विविध पहलुओं पर रोशनी डालती विख्यात नाट्य-चिन्‍तक व निर्देशक देवेन्द्र राज अंकुर की यह पुस्तक उनकी पहली पुस्तकों की ही तरह हिन्दी में आधुनिक नाट्य-विमर्श की कमी को पूरा करती है।

देवेन्द्र राज अंकुर गत कई दशकों से भारतीय रंगमंच और ख़ास तौर से हिन्दी थिएटर के साथ गहराई से जुड़े रहे हैं। नाटक में लेखन से लेकर उसकी प्रस्तुति तक के विभिन्न पड़ावों को लेकर वे लगातार विचार करते रहे हैं। विभिन्न नाटकों की प्रस्तुतियों के विश्लेषण तथा थिएटर के इतिहास और वर्तमान की विभिन्न समस्याओं पर उन्होंने निर्णायक विचार हिन्दी जगत को दिए हैं।

इस पुस्तक में उन्होंने जिन विषयों को उठाया है, उनमें कुछ प्रमुख हैं—‘नाटक की दर्शकीयता’, ‘नाटक का अध्ययन और अध्यापन’, ‘रंगमंच और नाटक’, ‘हिन्दी में मौलिक नाटक लेखन की समस्याएँ’, ‘भारतेन्दु का रंग-चिन्तन’, ‘नाटककारों के सामाजिक सरोकार’, ‘रंगमंच और नारी तथा दलित’, ‘मृच्छकटिक’ और ‘यहूदी की लड़की’ की प्रस्तुतियों का अध्ययन आदि।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2013
Edition Year 2021, Ed. 3rd
Pages 235p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 2
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Editorial Review

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Devendra Raj Ankur

Author: Devendra Raj Ankur

देवेन्द्र राज अंकुर

 

दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में एम.ए.। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निर्देशन में विशेषज्ञता के साथ नाट्य-कला में डिप्लोमा। बाल भवन, नई दिल्ली के वरिष्ठ नाट्य-प्रशिक्षक। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के सदस्य। भारतेन्दु नाट्य अकादमी, लखनऊ में नाट्य-साहित्य, रंग स्थापत्य और निर्देशन के अतिथि विशेषज्ञ। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में भारतीय शास्त्रीय नाटक और सौन्दर्यशास्त्र के सहायक प्राध्यापक। ‘सम्भव’, नई दिल्ली के संस्थापक सदस्य और प्रमुख निर्देशक। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के साथ आधुनिक भारतीय रंगमंच में एक बिलकुल नई विधा ‘कहानी का रंगमंच’ के प्रणेता। विभिन्न शौकिया और व्यावसायिक रंगमंडलियों के साथ पूरे भारत और विदेशों में 400 से अधिक कहानियों, 16 उपन्यासों और 60 नाटकों की प्रस्तुति।

 

बांग्ला, उड़िया, कन्नड़, पंजाबी, कुमाऊँनी, तमिल, तेलगू, मलयालम, अंग्रेज़ी, धीवेही, सिंहली और रूसी भाषाओं में रंगकर्म का अनुभव। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा विभिन्न शहरों में संचालित गहन रंगमंच कार्यशालाओं में विशेषज्ञ, निर्देशक तथा शिविर और कार्यशाला निर्देशक के रूप में सम्बद्ध। देश के विभिन्न रंगमंच संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अतिथि परीक्षक। दूरदर्शन के लिए नाट्य-रूपान्तरण और निर्देशन। हिन्दी की सभी प्रमुख पत्रिकाओं में रंगमंच पर लेख और समीक्षाएँ। अंग्रेज़ी और अन्य भारतीय भाषाओं से कई प्रसिद्ध नाटकों का हिन्दी में अनुवाद। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में स्वतंत्र रूप से अभिनय, आधुनिक भारतीय नाटक, रंग स्थापत्य, प्रस्तुति प्रक्रिया, दृश्य सज्जा और रंगभाषण के अध्यापन का भी अनुभव। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, क्षेत्रीय अनुसंधान व संसाधन केन्द्र, बंगलौर के निदेशक।

 

हांगकांग, चीन, डेनमार्क, श्रीलंका, मालदीव, रूस, नेपाल, फ्रांस, मॉरीशस, बांग्लादेश, जापान, सिंगापुर, थाइलैंड, इटली, यू.के., पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया इत्यादि देशों में रंगकार्यशालाएँ, प्रस्तुतियाँ और अध्यापन।

 

प्रमुख कृतियाँ : ‘पहला रंग’, ‘रंग कोलाज’, ‘दर्शन-प्रदर्शन’, ‘अन्तरंग बहिरंग’, ‘रंगमंच का सौन्दर्यशास्त्र’, ‘पढ़ते सुनते देखते’ आदि।

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