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Andhere Se Bahar Nikalate Huye-Paper Back

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‘अँधेरे से बाहर निकलते हुए’ अमर कुशवाहा की बहुत सहज और सीधी लेकिन अर्थवान कविताओं का पहला संग्रह है। अपनी जमीन, अपनी जिन्दगी, अपने संघर्षों की कथा कहती ये कविताएँ मानवीय संवेदनाओं को एक नई दृष्टि देती हैं, साथ ही कविता के माध्यम से समाज को एक नए रूप में संस्कारित करने का प्रयास भी करती हैं। समाज की यांत्रिकता, बाजारूपन एवं व्यक्ति के संवेदनहीन होते जाने की समस्या को उकेरती ये कविताएँ विकासशील भारत के एकपक्षीय विकास को रेखांकित करते हुए जीवन से साहित्य एवं संस्कृति के लुप्त हो जाने पर चिन्ता भी प्रकट करती हैं।

समकालीन जीवन को अपनी कविता का विषय बनाता कवि इन कविताओं में समय के दर्द को भी चित्रित करता है और आधुनिक जीवन की आकुलताओं-व्याकुलताओं को एक नया स्वर देता है। ये स्वर यथार्थ की तह तक जाने के स्वर हैं, जीवन के खट्टे-मीठे स्वाद के स्वर हैं, दैनिक जीवन के गणित के स्वर हैं, व्यवस्था के स्वर हैं और समाज के मार्मिक प्रसंगों के स्वर हैं।

इन कविताओं का खासतौर पर देखने लायक पक्ष ये है कि आधुनिक जीवन-शैली के अनुसार कवि की कविताओं के छंद भी आधुनिक हैं। छंदों में उतार है, चढ़ाव है, लहर है, प्रवाह है, किन्तु इस सबके बावजूद कविताएँ बारम्बार गाँव के सुख-दुःख की ओर लौट आती हैं। गाँव के नदी-नालों, खेत-खलिहानों की ओर लौट आती हैं।

समाज और राजनीति में व्याप्त झूठ-फरेब, लूट-खसोट, अत्याचार-अनाचार से क्षुब्ध कवि अपनी स्पष्ट एवं बेबाक पंक्तियों से राजनेताओं को आगाह करते हुए किसी भी समाज की मुक्तिकामी चेतना को ऊर्जस्वित करने का प्रयास भी करता है 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 152p
Price ₹299.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 13.5 X 1
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Amar Kushwaha

Author: Amar Kushwaha

अमर कुशवाहा

जन्म : उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर ज़िले की बाँसी तहसील के ‘गोरी’ नामक एक छोटे से ग्राम में 1 जनवरी, 1985 को।

शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा पास के गाँव ‘जोगिया बुज़ुर्ग' में स्थित सरकारी विद्यालय में हुई। फिर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से स्नातक।

सिविल सर्विस परीक्षा—2011 में इतिहास और हिन्दी साहित्य विषय लेकर ‘भारतीय प्रशासनिक सेवा’ (IAS) में चयन।

मसूरी स्थित 'लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशिक्षण अकादमी’ से प्रशिक्षण उपरान्त तमिलनाडु के विरुदुनगर ज़िले के ‘शिवकाशी’ राजस्व प्रभाग में ‘सब-कलेक्टर’ पद पर सितम्बर 2014 में नियुक्ति। ज़िलाधिकारी, तिरुपत्तूर जनपद, तमिलनाडु।

सम्प्रति : तमिलनाडु के नीलगिरी ज़िले के मुख्यालय ऊटी में ‘परियोजना निदेशक, पहाड़ी क्षेत्र विकास कार्यक्रम’ के पद पर भी कार्यरत रहे।

ई-मेल : [email protected]

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