Aao Viveksheel Banein

Self-Help,Social Studies
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Aao Viveksheel Banein
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प्रस्तुत पुस्तक डॉ. दाभोलकर के ‘सकाळ’ अखबार में छपे स्तम्भ-लेखन का संकलन है. इसमें डॉ. दाभोलकर के पाठकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर हैं लेकिन उनका स्वरुप प्रश्न-उत्तर का नहीं है. यह पत्र-शैली के रूप में किया गया लेखन है. डॉ. दाभोलकर के मतानुसार यह एक कार्यकर्ता का लेखन है.

प्रस्तुत पुस्तक दरअसल युवाओं से संवाद है. डॉ. दाभोलकर यह जानते थे कि परिवर्तन की आधारशिला युवक ही हैं. इसी कारण उन्होंने प्रस्तुत पुस्तक में युवाओं के मन में आनेवाले अंधविश्वास सम्बन्धी प्रश्नों का वैज्ञानिक ढंग से विवेचन प्रस्तुत किया है. पुस्तक में भूत-प्रेत, ज्योतिष,सम्मोहन, पाखंड, सत्यनारायण, मुहूर्त, वास्तुशास्त्र समारोह, जनेऊ, चमत्कार आदि को लेकर विज्ञानवादी विचार व्यक्त किये गए हैं. यह पुस्तक समाज में प्रचलित अंधविश्वासों पर एक गंभीर चिंतन है.

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2019
Edition Year 2019, 1st Ed.
Pages 142p
Translator Amol Palkar
Editor Dr. Sunil kumar Lavte
Publisher Sarthak (An imprint of Rajkamal Prakashan)
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Editorial Review

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Narendra Dabholkar

Author: Narendra Dabholkar

नरेंद्र दाभोलकर

जन्म : 1 नवम्बर, 1945

एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई कर चुके डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने सन् 1982 में अंधविश्वास उन्मूलन कार्य का प्रारंभ किया। 1989 में ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ की स्थापना की। आजन्म समिति के कार्याध्यक्ष रहे। अंधविश्वास उन्मूलन विषय पर दर्जन-भर पुस्तकों का लेखन किया। पुस्तकों को अनेक पुरस्कार मिले। 20 अगस्त, 2013 को अज्ञात तत्त्वों द्वारा गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। मरणोपरांत भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किए गए।

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