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Aadhunik Bharat Mein Samajik Parivartan-Hard Back

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9788126717026
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भारत के प्रमुख समाज एवं नृ-विज्ञानवेत्ता एम.एन. श्रीनिवास की यह महत्त्वपूर्ण कृति विश्व-कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर-स्मृति-भाषणमाला के सारभूत तत्त्वों पर आधारित है। आधुनिक भारतीयता के सन्‍दर्भ में रवीन्द्रनाथ ठाकुर की विचारक के रूप में एक अलग महत्ता है। अपनी अमरीकी और यूरोपीय यात्राओं के दौरान विश्वकवि ने जो विचार प्रकट किए हैं, वे इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय सामाजिक परिवर्तनों में पाश्चात्य प्रभावों के प्रति उनकी गहरी रुचि थी।

स्वाधीनता-प्राप्ति के बाद भारतीय समाज में पश्चिमीकरण की प्रक्रिया और भी तेज़ हुई है, जिसके व्यापक प्रभावों को सांस्कृतिक जीवन पर स्पष्ट देखा जा सकता है। लेखक ने इन प्रभावों को संस्कृतीकरण और पश्चिमीकरण के सन्‍दर्भ में व्याख्यायित किया है तथा एक अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता बताई है। उसके अनुसार पश्चिमीकरण भारतीय समाज के किसी विशेष अंश तक सीमित नहीं है और उसका महत्त्व—उससे प्रभावित होनेवालों की संख्या और प्रभावित होने के प्रकार, दोनों ही दृष्टियों से—लगातार बढ़ रहा है। वस्तुत: आधुनिक भारतीय समाज के अन्तर्विकास और उसके अन्तर्विरोधों को समझने के लिए यह एक मूल्यवान पुस्तक है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2012
Edition Year 2019, Ed. 16th
Pages 181p
Price ₹895.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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M.N. Shrinivas

Author: M.N. Shrinivas

एम.एन. श्रीनिवास
एम.एन. श्रीनिवास इंस्टीट्यूट फ़ॉर सोशल एंड इकॉनॉमिक चेंज, बंगलोर की समाजशास्त्र इकाई के सीनियर फ़ेलो और प्रमुख थे। वे ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में (1948-51) भारतीय समाजशास्त्र के व्याख्याता, एम.एस. विश्वविद्यालय, बड़ौदा में (1952-59) और दिल्ली विश्वविद्यालय में (1952-72) समाजशास्त्र के प्रोफ़ेसर रहे।
1953-54 में वह मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के साइमन सीनियर रिसर्च फ़ेलो और 1956-57 में ब्रिटेन और अमेरिका में रॉक फ़ैलर फ़ेलो रहे। वे पहले भारतीय हैं जिन्हें रॉयल एन्थ्रॉपॉलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड की मानद फ़ेलोशिप मिली। इसके अलावा, 1963 में लेखक कुछ समय के लिए बर्कले, कैलिफ़ोर्निया में टैगोर लैक्चरर और डिपार्टमेंट ऑफ़ सोशल एन्थ्रॉपॉलॉजी एंड सोशियोलॉजी के साइमन विजि़टिंग प्रोफ़ेसर रहे।
प्रकाशन : ‘मैरिज एंड फ़ैमिली इन मैसूर’, ‘रिलिजन एंड सोसाइटी अमंग द कुर्ग्‍स ऑफ़ साउथ इंडिया’, ‘कास्ट्स इन मॉडर्न इंडिया एंड अदर एसेज’, ‘द रेमेम्बेरेड विलेज’, इंडियन सोसाइटी थ्रू पर्सनल राइटिंग्स’, ‘विलेज, कास्ट, जेन्डर एंड मेथॅड’, ‘सोशल चेंज इन मॉडर्न इंडिया’, ‘द डोमिनेंट कास्ट एंड अदर एसेज’ ‘डाइमेंशन्स ऑफ़ सोशल चेंज इन इंडिया’ आदि।
सम्मान : रॉयल एन्थ्रॉपॉलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड का ‘रिवर्स मेमोरियल मेडल’ (1955), भारतीय नृतत्त्वशास्त्र में योगदान के लिए ‘शरतचन्द्र रॉय मेमोरियल गोल्ड मेडल’ (1958) और ‘जी.एस. धुर्वे अवार्ड’ (1978)। शिकागो विश्वविद्यालय और मैसूर विश्वविद्यालय की मानद उपाधियाँ प्राप्‍त। भारत सरकार द्वारा 1977 में ‘पद्मभूषण’ से सम्‍मानित।
निधन : 30 नवम्बर, 1999

 

 

 

 

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