Upbhokta Adaltein Swaroop Evam Sambhavnaen

Law
Author: Premlata
You Save 10%
Out of stock
Only %1 left
SKU
Upbhokta Adaltein Swaroop Evam Sambhavnaen

अपार सम्भावनाओं से भरा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लगभग एक समानान्तर न्याय व्यवस्था का स्वरूप ग्रहण करता जा रहा है। उपभोक्ता इस क़ानून से अनभिज्ञ नहीं रह गया है तथापि इन अदालतों के स्वरूप, न्याय-प्रक्रिया आदि की विधिवत् जानकारी के लिए अभी अपेक्षित पद्धति विकसित नहीं हो पाई है। कुछ ग़ैर-सरकारी संस्थाएँ इस दिशा में मुखर हैं व इस अधिनियम के दैनंदिन सशक्तीकरण का बहुत श्रेय इन संस्थाओं को जाता है, किन्तु अब स्थिति यह नहीं रही कि केवल जन-जागृति से ही सन्तोष कर लिया जाए। आवश्यकता अब इस बात की भी है कि उपभोक्ता क़ानूनों की शिक्षा भी अब विधिवत् रूप से शिक्षण संस्थाओं के माध्यम से दी जाए। इस आवश्यकता को सभी स्तरों पर अनुभव किया जा रहा है।

इस पुस्तक के माध्यम से एक छोटा-सा प्रयास किया गया है कि हम उपभोक्ता के पास जा सकें, उन्हें यह सामान्य जानकारी दे सकें कि वास्तव में उपभोक्ता अदालतें हैं क्या? जब हम यह दावा करते हैं कि उपभोक्ता न्यूनतम ख़र्च करके बिना वकीलों के सहयोग के अपनी बात अपनी भाषा में स्वयं इस अदालत में रख सकता है तो उपभोक्ता के लिए पहली आवश्यकता यह जानने की हो जाती है कि कैसे और कहाँ? इन सभी प्रश्नों के समाधान के लिए इस पुस्तक को कैसे और कहाँ से ही प्रारम्भ किया गया है और फिर क्या-क्या, कितने विषय, कैसी शिकायतें—सब जानकारियों को सिलसिलेवार देने का प्रयास किया गया है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Edition Year 2004
Pages 151p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21 X 14 X 1
Write Your Own Review
You're reviewing:Upbhokta Adaltein Swaroop Evam Sambhavnaen
Your Rating

Author: Premlata

प्रेमलता

जन्म : 14 मई, 1952; पंजाब।

शिक्षा : एम.ए. (दिल्ली विश्वविद्यालय), डिप्लोमा अनुवाद (गृह मंत्रालय, भारत सरकार), एल.एल.बी. (दिल्ली विश्वविद्यालय), शोधकार्य—‘कृष्णा सोबती का कथा साहित्य’। प्रबन्धन प्रशिक्षण (मानव संसाधन विभाग, कलकत्ता), वाणिज्यिक विधि, श्रमिक विधि, आर्बिट्रेशन, संविधा विधि प्रशिक्षण (अनुसन्धान एवं विकास केन्द्र, राँची)।

कार्य : अध्यापन—कार्मिल कॉन्वेन्ट स्कूल, दुर्गापुर एवं दिल्ली विश्वविद्यालय (नान कॉलेजिएट, छात्राएँ); प्रोजेक्ट विभाग, सतर्कता विभाग, विधि विभाग, कार्मिक विभाग का कार्य (स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लि.), कार्मिक विभाग व विधि विभाग में विधिक परामर्शदाता व विभागाध्यक्ष; सदस्य (जज) उपभोक्ता फ़ोरम, पश्चिमी क्षेत्र, नई दिल्ली। अब सेवानिवृत्‍त।

प्रमुख कृतियाँ : ‘स्वीकार किया मैंने’, ‘रेखाओं में रुका आकाश’ (कहानी-संग्रह); ‘गर्म राख के नीचे’ (कविता-संग्रह); ‘विधि व्यवस्था का यथार्थ’, ‘उपभोक्ता क़ानून’ (विधिक पुस्तकें) आदि।

Read More
Books by this Author
Back to Top