Umraonagar Mein Kuchh Din

Gyanpeeth Awards,Fiction : Novel
Author: Shrilal Shukla
Out of stock
Only %1 left
SKU
Umraonagar Mein Kuchh Din

‘उमरावनगर में कुछ दिन’ श्रीलाल शुक्ल की प्रस्तुत पुस्तक में तीन व्यंग्य कथाएँ सम्मिलित हैं—‘उमरावनगर में कुछ दिन’, ‘कुन्ती देवी का झोला’ और ‘मम्मीजी का गधा’। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, संग्रह की आधार-कथा है : ‘उमराव नगर में कुछ दिन’ उमराव नगर यानी एक ऐसा गाँव, जिसे नियोजित विकास का चमत्कार दिखाने के लिए चुना गया है, लेकिन जिसके सार्वजनिक जीवन में आज़ादी के बाद पनपे सारे अवसरवाद और भ्रष्टाचार के साथ हुए तमाम समझौते मौजूद हैं। ‘कुन्तीदेवी का झोला’ में डाकुओं और पुलिस के आतंकवाद का बेजोड़ चित्रण है, जिसका शिकार अन्ततः निर्दोष जनता को बनना पड़ता है। ‘मम्मीजी का गधा’ में अफ़सरशाही के अहं को विषय बनाया गया है और प्रसंगतः इस बात की भी ख़बर ली गई है कि नेता लोग अर्थहीन-सी स्थितियों का किस प्रकार लाभ उठाते हैं। निश्चय ही यह संग्रह श्रीलाल शुक्ल की सुपरिचित व्यंग्य-प्रतिभा को नई ऊँचाई सौंपता है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 1988
Edition Year 2006, Ed. 3rd
Pages 79p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18 X 12.5 X 1
Write Your Own Review
You're reviewing:Umraonagar Mein Kuchh Din
Your Rating

Editorial Review

It is a long established fact that a reader will be distracted by the readable content of a page when looking at its layout. The point of using Lorem Ipsum is that it has a more-or-less normal distribution of letters, as opposed to using 'Content here

Shrilal Shukla

Author: Shrilal Shukla

श्रीलाल शुक्ल

जन्म : 31 दिसम्बर, 1925 को लखनऊ जनपद (उ.प्र.) के अतरौली गाँव में।

शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक।

प्रकाशित कृतियाँ : उपन्यास—‘सूनी घाटी का सूरज’, ‘अज्ञातवास’, ‘राग दरबारी’, ‘आदमी का ज़हर’, ‘सीमाएँ टूटती हैं’, ‘मकान’, ‘पहला पड़ाव’, ‘बिस्रामपुर का सन्त’; कहानी-संग्रह—‘यह घर मेरा नहीं’, ‘सुरक्षा तथा अन्य कहानियाँ’, ‘इस उम्र में’; व्यंग्य-संग्रह—‘अंगद का पाँव’, ‘यहाँ से वहाँ’, ‘मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएँ’, ‘उमरावनगर में कुछ दिन’, ‘कुछ ज़मीन पर कुछ हवा में’, ‘आओ बैठ लें कुछ देर’, ‘अगली शताब्दी का शहर’, ‘जहालत के पचास साल’; आलोचना—‘अज्ञेय : कुछ राग और कुछ रंग’; विनिबन्ध—‘भगवतीचरण वर्मा’, ‘अमृतलाल नागर’; बाल-साहित्य—‘बब्बर सिंह और उसके साथी’।

 अनुवाद : 'पहला पड़ाव’ अंग्रेज़ी में अनूदित और 'मकान’ बांग्ला में। 'राग दरबारी’ सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं सहित अंग्रेज़ी में।

प्रमुख सम्मान : ‘ज्ञानपीठ पुरस्‍कार’, ‘व्यास सम्मान’, ‘पद्मभूषण सम्मान’, ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का ‘गोयल साहित्य पुरस्कार’, ‘लोहिया अतिविशिष्ट सम्मान’, म.प्र. शासन का ‘शरद जोशी सम्मान’, ‘मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’।

निधन : 28 अक्टूबर, 2011

Read More
Books by this Author

Back to Top