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Udhar Ke Log-Paper Back

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अजय नावरिया का यह उपन्यास ‘उधर के लोग’ भारतीय संस्कृति की विशिष्टता और वैयक्तिक सत्ता के साथ-साथ अन्तरराष्ट्रीय मुद्दों को रेखांकित करता है। बेशक, यह उनका पहला उपन्यास है, लेकिन अपनी शिल्प संरचना और वैचारिक परिपक्वता में, यह अहसास नहीं होने देता।

उपन्यास में हिन्दू कहे जानेवाले समाज के अन्तर्विरोधों, विडम्बनाओं और पारस्परिक द्वेष के अलावा, उसके रीति-रिवाज़ो का भी सूक्ष्म और यथार्थपरक अंकन किया गया है। यह द्वन्द्व भी उभरकर आता है कि क्या वर्णाश्रम धर्म ही हिन्दू धर्म है या कुछ और भी है?

उपन्यास, पाठकों में प्रश्नाकुलता पैदा करता है कि क्या ‘जाति’ की उपस्थिति के बावजूद ‘जातिवाद’ से बचा जा सकता है? क्यों विभिन्न समुदाय, एक-दूसरे के साथ, सह-अस्तित्व के सिद्धान्त के तहत नहीं रह सकते? क्यों भारतीय साहित्य का संघर्ष, डी-क्लास होने के पहले या साथ-साथ डी-कास्ट होने का संघर्ष नहीं बना? इसके अलावा उपन्यास में बाज़ार की भयावहता, वेश्यावृत्ति, यौन-विकार, विचारधाराओं की प्रासंगिकता, प्रेम, विवाह और तलाक़ पर भी खुलकर बात की गई है।

उपन्यासकार की सबसे बड़ी विशेषता यथार्थ को रोचक, प्रभावोत्पादक और समृद्ध भाषा में रूपान्तरित करने में है। यह सब उन्होंने नायक की जीवन-कथा के माध्यम से बड़े कुशल ढंग से किया है।

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2013
Edition Year 2023, Ed. 2nd
Pages 187p
Price ₹250.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Ajay Navriya

Author: Ajay Navriya

अजय नावरिया

जन्म : दिल्ली के एक गाँव कोटला मुबारकपुर में।

शिक्षा : एम.ए., एम-फ़िल्., पी-एच.डी. (जे.एन.यू.)।

उपन्यास : ‘उधर के लोग’।

कहानी-संग्रह : ‘पटकथा और अन्य कहानियाँ’ (2006)।

सम्पादन : ‘हंस’ के दलित विशेषांक (2004) और ‘नैतिकताओं का टकराव’ पर केन्द्रित अंक (2005) में सम्पादन सहयोग तथा ‘डॉ. उदितराज के लेख’ (2004) पुस्तक का सम्पादन।

सम्मान : ‘सुधा स्मृति साहित्य सम्मान’ (2007), हिन्दी अकादमी दिल्ली का ‘साहित्यिक कृति सम्मान’।

‘कथाक्रम’ और ‘हंस’ में कहानी पुरस्कृत तथा चयनित।

सम्प्रति : प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली।

ई-मेल : [email protected]

 

 

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