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Udayer Pathe-Pathe-Paper Back

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उदय शंकर, जिन्हें नृत्य का देवता माना गया, यह पुस्तक उनके विषय में है। उनके जीवन, स्वभाव, नृत्यकला, उनकी उपलब्धियों और ख्याति को रेखांकित करने के लिए यहाँ विभिन्न स्रोतों से जुटाई गई सामग्री को संकलित किया गया है।

पुस्तक का आरम्भ बिमल मुखोपाध्याय द्वारा खींचे गए चित्रों के, उनकी नृत्य-यात्रा के, प्रस्तुतीकरण से होता है। इस ऐतिहासिक और सुविस्तृत आलेख को शोधकर्ता लेखक शंकरलाल भट्टाचार्य ने लिखा है। बिमल मुखोपाध्याय एक असाधारण फ़ोटोग्राफ़र थे जो साइकिल लेकर विश्व-पर्यटन पर निकल गए थे, और अपने चित्रों के माध्यम से ही अपनी आजीविका अर्जित करते थे। उदय शंकर से भेंट होने के पश्चात् उनका क़ैमरा जैसे उनकी देह-गति पर ही केन्द्रित हो गया। यूरोप में हुए उनकी विभिन्न प्रस्तुतियों में लिए गए ये चित्र ही शंकरलाल जी के विवेचन के केन्द्र में हैं। यह निश्चय ही एक दुर्लभ प्रस्तुति है।

दूसरा आलेख पं. रविशंकर द्वारा लिखित एक संस्मरण है जिसमें उन्होंने उदय शंकर के व्यक्तित्व को निज अनुभवों के प्रकाश में आलोकित किया है। यही बात अमला शंकर के संस्मरणात्मक आलेख के बारे में कही जा सकती है, जिसे उन्होंने उनकी जीवन-संगिनी और सहचरी नर्तकी के रूप में लिखा है।

सत्यजित चौधुरी का विवेचन उदय शंकर द्वारा रचित फ़िल्म 'कल्पना' के विषय में है जिसका निर्माण 1998 में हुआ था। ढाई घंटे की इस नृत्य-केन्द्रित फ़िल्म को पहली भारतीय आधुनिक  फ़िल्म कहा जाता है।

“भारतीय प्रदर्शनकारी कलाओं के आधुनिक इतिहास में उदय शंकर का ऐतिहासिक और स्मरणीय अवदान रहा है। वे अपने समय की एक किंवदन्ती बन गए थे। उन पर सुलिखित और पर्याप्त सामग्री, दुर्भाग्य से, कम है। परम्परा की समझ और उसका पुनराविष्कार उनके नवाचार का अनिवार्य अंग था। इस नृत्यशिल्पी का जीवनालेख्य शंकरलाल भट्टाचार्य ने बहुत जतन से तैयार किया है और हमारे आग्रह पर उसका मूल बाङ्ला से हिन्दी में अनुवाद वरिष्ठ विद्वान्, साहित्यकलाप्रेमी और अनुवादक डॉ. रामशंकर द्विवेदी ने किया है। एक गौरवस्थानीय नृत्यशिल्पी पर यह दुर्लभ सामग्री रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत प्रस्तुत करते हुए हमें प्रसन्नता है।”

—अशोक वाजपेयी

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Publication Year 2019
Edition Year 2019, Ed. 1st
Pages 126p
Price ₹150.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Shankarlal Bhattacharya

Author: Shankarlal Bhattacharya

शंकरलाल भट्टाचार्य

जन्म 15 अगस्त, 1947। इनके पिता विख्यात विधि विशेषज्ञ थे। उनका नाम था—बंकिमचन्द्र भट्टाचार्य। वे विदग्ध पंडित और दानशील व्यक्ति थे। उनके घर का वातावरण पुस्तकों, राजनीति और संगीत से सराबोर था। शंकरलाल का पालन-पोषण इसी वातावरण में हुआ था। इन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए. विश्वविद्यालय में प्रथम श्रेणी में प्रथम रहकर किया था। शंकरलाल की कहानियों, उपन्यासों और प्रबन्ध-निबन्धों में कलकत्ता शहर के व्यक्तियों की स्मृति-सुधा और संगीत का विस्तार है।

उनके कहानी-संकलनों में प्रमुख हैं—‘ऐंगलो चाँद’, ‘गांधी के आततायी’ तथा ‘कवि की मृत्यु’। ‘प्रथम पुरुष’, ‘एई आमि एका अन्य’, ‘आघेन, हेलेन ओ सेई क्रन्याही’ जैसे उपन्यास उन्होंने लिखे हैं। ‘दार्शनिक की मृत्यु’, ‘चिन्ता की सीमा’, उनके समादृत प्रबन्ध संकलन हैं।

इसके अलावा उन्होंने सत्यजित राय, रविशंकर, उदय शंकर तथा सुनील गंगोपाध्याय के साथ विलायत ख़ाँ पर काम किया है। रविशंकर की आत्मकथा ‘राग अनुराग’ के वे सहलेखक हैं। उन्होंने हेमन्त मुखोपाध्याय के ग्रन्थ ‘आमार गानेर सुरलिपि’ नामक आत्म-स्मृति का भी सहलेखन किया है।

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