Udasi Baal Khole So Rahi Hai

Urdu Poetry
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Udasi Baal Khole So Rahi Hai
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'उदासी बाल खोले सो रही है' उर्दू के मश्हूर-ओ-मारूफ़ शाइर जनाब नासिर काज़मी के चुनिन्‍दा कलाम का संग्रह है जिसे उर्दू शाइरी के चाहनेवालों के लिए देवनागरी लिपि में पेश किया जा रहा है।

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2020
Edition Year 2020, Ed. 1st
Pages 129p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan - Rekhta Books
Dimensions 22 X 14 X 1
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Editorial Review

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Nasir Kazmi

Author: Nasir Kazmi

नासिर रज़ा काज़मी

उर्दू ग़ज़ल को नई भावात्मक गहराई और लयात्मकता से परिचित करानेवाले नासिर रज़ा काज़मी 8 दिसम्‍बर, 1925 को अम्बाला में पैदा हुए। इस्लामिया कॉलेज लाहौर से एफ़.ए. पास करने के बाद बी.ए. में पढ़ रहे थे, कि इम्तिहान दिए बग़ैर अपने वतन अम्बाला वापस चले गए। 1947 में दोबारा लाहौर गए। एक साल तक ‘औराक़-ए-नौ’ नाम की पत्रिका के सम्‍पादक-मंडल में शामिल रहे। अक्तूबर 1952 से पत्रिका ‘हुमायूँ’ का सम्पादन-कार्य सम्भाला। नासिर की शे’र-गोई का आग़ाज़ 1940 से हुआ। हफ़ीज़ होशयारपुरी के शागिर्द रहे। रेडियो पाकिस्तान से भी जुड़े रहे। 2 मार्च, 1972 को लाहौर में आख़िरी साँस ली। उनकी किताबों के नाम ये हैं—‘बर्ग-ए-नय’, ‘दीवान’, ‘पहली बारिश’, ‘निशात-ए-ख़्वाब’, ‘सुर की छाया’ (मंज़ूम ड्रामा), ‘ख़ुश्क चश्मे के किनारे’ (लेख), ‘नासिर काज़मी की डायरी’, ‘इन्तिख़ाब-ए-वली दकनी’, ‘इन्तिख़ाब-ए-मीर’, ‘इन्तिख़ाब-ए-नज़ीर अकबराबादी’, ‘इन्तिख़ाब-ए-इंशा अल्लाह ख़ाँ इंशा’।

निधन : 2 मार्च, 1972

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