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Tat-Sam-Paper Back

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9788126703029
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राजी सेठ का उपन्यास ‘तत-सम’ जिजीविषा के मर्म-भेदन का आलोकपर्व है। इस उपन्यास में नियतिबद्ध मनुष्यों को अपने चैतन्य की तलाश है क्योंकि यहाँ शत्रु समाज नहीं, अपनी जड़ता है। ‘तत-सम’ का उद्घोष है—जिजीविषा के उत्सव का दस्तावेज़ सदा अर्थ-जीवी रहेगा। यह उपन्यास और भी कई अर्थों में अपूर्व है। इसकी संरचना में घटनाएँ नहीं, अपितु मनःस्थितियाँ महत्त्वपूर्ण हैं।

यहाँ दु:ख दु:ख नहीं, दृष्टि है—कुछ ऐसी प्राणवत्ता का उपार्जन, जो गिर जाने पर कपड़े झाड़कर खड़े हो जाने का संकल्प और आत्मबल भी देता है अपने को अपनी समग्रता में पाने के लिए।

भाषा, इस उपन्यास में अभिव्यक्ति का उपकरण मात्र नहीं है बल्कि शुद्ध संवेदन है। स्थिति की अनुकूलता में पूरी तरह विगलित और स्पन्दित। पाठ की सघन बुनावट—हर बार नए से नया अर्थ देने में सक्षम। शैली-शिल्प की ऐसी प्रस्तुति और ऐसी जीवन-दृष्टि हिन्दी उपन्यासों में अन्यत्र विरल है। अपनी इस विशेषता के कारण ‘तत-सम’ एक ऐसी अनूठी कृति है जो अपने पात्रों की नियति को तत्-समता के अभिशाप से उबार लाती है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 1998
Edition Year 2025, Ed. 4th
Pages 256p
Price ₹350.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.8
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Raji Seth

Author: Raji Seth

राजी सेठ

राजी सेठ का जन्म सन् 1935 में नौशेहरा छावनी, पाकिस्तान (अविभाजित भारत) में हुआ। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. और ‘तुलनात्मक धर्म और भारतीय दर्शन’ विषय पर विशेष अध्ययन किया। 1974-75 से लेखन की शुरुआत की। उपन्यास, कहानी, कविता, निबन्ध आदि सभी विधाओं में लिखा। अनुवाद कार्य भी किए।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—तत-सम (उपन्यास); निष्कवच (दो उपन्यासिकाएँ); अन्धे मोड़ से आगे, तीसरी हथेली, यात्रा-मुक्त, दूसरे देशकाल में, सदियों से, यह कहानी नहीं, किसका इतिहास, गमे हयात ने मारा, ख़ाली लिफ़ाफ़ा, मार्था का देश, बाहरी लोग (कहानी-संग्रह); पगडंडियों पर पाँव (साक्षात्कार); जहाँ से उजास (संस्मरण)।

अंग्रेज़ी और विभिन्न भारतीय भाषाओं में उनकी पुस्तकों के अनुवाद हुए हैं। उन्होंने जर्मन कवि रिल्के के 100 पत्रों का अनुवाद किया है। ऑक्टावियो पाज़, दायसाकू इकेदा, लक्ष्मी कण्णन आदि लेखकों की रचनाओं के भी अनुवाद किए हैं।

उन्हें ‘हिन्दी अकादमी सम्मान’, ‘भारतीय भाषा परिषद पुरस्कार’, ‘अनन्त गोपाल शेवड़े पुरस्कार’, ‘वाग्मणि सम्मान’, ‘संसद साहित्य परिषद सम्मान’, ‘जनपद अलंकरण’, ‘टैगोर लिटरेचर अवार्ड’, ‘शिरोमणि सम्मान’ समेत कई पुरस्कारों से पुरस्कृत किया गया है।

निधन : 27 नवम्बर, 2025

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