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Shrikant-Paper Back

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शरतचन्द्र की प्रतिभा स्त्रियों की यंत्रणा के चित्रण में अपने शिखर पर पहुँची है। उनका लगभग हर उपन्यास किसी-न-किसी रूप में स्त्रियों के जीवन की विडम्बनाओं के इर्द-गिर्द बुना हुआ है।

‘श्रीकान्त’ का नायक एक घुमक्कड़ है लेकिन उसकी इस यात्रा में उपन्यास कई ऐसी महिलाओं को हमारे सामने लाता है जिनके माध्यम से हम तत्कालीन समाज और व्यक्ति, पवित्रता और पाप की अवधारणाओं और विद्रोह और स्वीकृति जैसे शाश्वत द्वन्द्वों के अन्तर्संघर्ष को समझने की दिशा में सोचना शुरू करते हैं। इस उपन्यास में आईं राजलक्ष्मी, अन्नदा दीदी और सुनन्दा जैसे स्त्री पात्र आज भी हमें अपने आसपास के ही चरित्र लगते हैं। इनके जीवन और उसकी परिस्थितियों के द्वारा आज भी औरत के उस दु:ख को जाना जा सकता है जिसमें आज भी कोई बहुत ज़्यादा कमी नहीं आई है।

उल्लेखनीय है कि इस उपन्यास का अनुवाद नए सिरे से किया गया है, उन तमाम अंशों को साथ रखते हुए जो अभी तक उपलब्ध अनुवादों में छोड़ दिए गए थे। एक सम्पूर्ण उत्कृष्ट उपन्यास।

 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Vimal Mishra
Editor Not Selected
Publication Year 2012
Edition Year 2024, Ed. 3rd
Pages 528p
Price ₹499.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 3.5
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Sharatchandra

Author: Sharatchandra

शरतचन्द्र

जन्म : 15 सितम्बर, 1876 को हुगली ज़िले के देवानंदपुर (पश्चिम बंगाल) में हुआ।

प्रमुख कृतियाँ : ‘पंडित मोशाय’, ‘बैकुंठेर बिल’, ‘मेज दीदी’, ‘दर्पचूर्ण’, ‘श्रीकान्त’, ‘अरक्षणीया’, ‘निष्कृति’, ‘मामलार फल’, ‘गृहदाह’, ‘शेष प्रश्न’, ‘देवदास’, ‘बाम्हन की लड़की’, ‘विप्रदास’, ‘देना पावना’, ‘पथेर दाबी’ और ‘चरित्रहीन’।

‘चरित्रहीन’ पर आधारित 1974 में फ़िल्म बनी थी। ‘देवदास’ फ़िल्म का निर्माण तीन बार हो चुका है। इसके अतिरिक्त ‘परिणीता’ 1953 और 2005 में, ‘बड़ी दीदी’ (1969) तथा ‘मँझली बहन’ आदि पर भी चलचित्रों के निर्माण हुए हैं। ‘श्रीकान्त’ पर टी.वी. सीरियल भी बन चुका है।

निधन : 16 जनवरी, 1938

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