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Shigaf-Hard Cover

ISBN: 9788126718528
Edition: 2023, Ed. 3rd
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
Special Price ₹590.75 Regular Price ₹695.00
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विस्थापन का दर्द महज़ एक सांस्कृतिक, सामाजिक विरासत से कट जाने का दर्द नहीं है, बल्कि अपनी खुली जड़ें लिए भटकने और कहीं जम न पाने की भीषण विवशता है, जिसे अपने निर्वासन के दौरान सैनसबेस्टियन (स्पेन) में रह रही अमिता, लगातार अपने ब्लॉग में लिखती रही है। डॉन किहोते की ‘रोड टू ला मांचा’ से कश्मीर वादी में लौटने की, अमिता की भटकावों तथा असमंजस-भरी इस यात्रा को अद्भुत तरीक़े से समेटता हुआ यह उपन्यास विस्थापन और आतंकवाद की कोई व्याख्या या समाधान नहीं प्रस्तुत करता, वरन् आस्था-अनास्था की बर्बर लड़ाइयों के बीच, कुचले जाने से रह गए कुछ जीवट पलों को जिलाता है और ज़मीन पर गिर पड़े उस दिशा संकेतक बोर्ड को उठाकर फिर-फिर गाड़ता है जिस पर लिखा है—भाई मेरे, अमन का एक रास्ता इधर से भी होकर गुज़रता है।

शिगाफ़ यानी एक दरार जो कश्मीरियत की रूह में स्थायी तौर पर पड़ गई है, जिसमें से धर्मनिरपेक्षता एक हद तक रिस चुकी है, इस शिगाफ़ को भरने के लिए प्रयासरत है उपन्यास का पत्रकार नायक ज़मान। अमिता और ज़मान जिनका लक्ष्य तो एक है मगर फिर भी दो विपरीत व विषम अतीत से उपजे जीवन-मूल्यों को सहेजते हुए वे कई बार प्रक्रिया तथा प्रतिक्रिया से उलझते हुए आपस में टकराते रहते हैं। अमिता के ब्लॉग, यास्मीन की डायरी, मानव बम जुलेखा का मिथकीय कोलाज, अलगाववादी नेता वसीम के एकालाप के ज़रिए कश्मीर और कश्मीरियत की विदीर्ण व्यथा-कथा को अलग कोण, नए शैलीगत प्रयोगों तथा ताज़गी-भरी भाषा के साथ अपने उपन्यास ‘शिगाफ़’ में अनूठे ढंग से प्रस्तुत कर रही हैं—मनीषा कुलश्रेष्ठ।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2010
Edition Year 2023, Ed. 3rd
Pages 256p
Price ₹695.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2
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Manisha Kulshreshtha

Author: Manisha Kulshreshtha

मनीषा कुलश्रेष्ठ

मनीषा कुलश्रेष्ठ लोकप्रिय कथाकार तो हैं ही, पर्यावरण चिन्तक भी हैं। ‘किनाया’ से पहले उनके सात उपन्यास, ‘शिगाफ़’, ‘शालभंजिका’, ‘पंचकन्या’, ‘स्वप्नपाश’, ‘मल्लिका’, ‘सोफ़िया’ और मातृसत्ता पर केन्द्रित उपन्यास ‘त्रिमाया’ आ चुके हैं। साथ ही उनके दस कहानी-संग्रह प्रकाशित हैं।  कथेतर में दो यात्रा-वृत्तान्त ‘होना अतिथि कैलाश का’ और ‘घुमक्कड़ी अंग्रेज़ी साहित्य के गलियारों’ तथा रज़ा फ़ाउंडेशन फ़ेलोशिप के तहत नृत्यकला पर ‘बिरजू लय’ पुस्तक आ चुकी है।

उन्हें के.के. बिड़ला फ़ाउंडेशन, राजस्थान साहित्य अकादमी के ‘रांगेय राघव सम्मान’, ‘गीतांजलि इंडो-फ्रेंच लिटरेरी प्राइज़ ज्यूरी अवार्ड’, ‘वनमाली कथा सम्मान’, ‘ढ़ींगरा फ़ाउंडेशन अन्तरराष्ट्रीय कथा सम्मान’, ‘इन्दु शर्मा कथा सम्मान’, ‘स्पन्दन सम्मान’, ‘अन्तरराष्ट्रीय वातायन यूके सम्मान’ जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। उन्हें ‘रज़ा फ़ेलोशिप’ के अलावा ‘कृष्ण बलदेव वैद फ़ेलोशिप’ और संस्कृति मंत्रालय के ‘सीनियर फ़ेलोशिप’ से भी सम्मानित किया गया है।

उनके उपन्यास ‘शालभंजिका’ का डच भाषा में अनुवाद तथा कई कहानियों का अंग्रेज़ी और रूसी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी अनुवाद हो चुका है।

वे नेशनल फ़िल्म अवार्ड 2019 और इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल गोवा 2021 की ज्यूरी सदस्य भी रही हैं। आजकल जयपुर में रहती हैं और रचनात्मक लेखन पर एक वार्षिक आयोजन ‘कथाकहन’ करती हैं।

ई-मेल : [email protected]

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