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Shadi Se Peshtar-Hard Cover

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9788126701797
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शादी, ख़ासकर लड़कियों की एक कठिन, जटिल और अत्याधुनिक समस्या बनती जा रही है। वह जीवन का एक मुक़ाम है, परम और चरम लक्ष्य नहीं, ऐसी प्रतीति पढ़ी-लिखी और तथाकथित आधुनिक लड़की को भी नहीं हो पाती, क्योंकि बहुत कुछ बदलने के बावजूद समाज जस का तस रह गया है। जींस पहननेवाली बाल-कटी लड़की राहगीरों को भले ही आज़ाद, खिलंदड़ और कभी-कभी लड़का तक होने का आभास दे या भ्रम पैदा करे, लेकिन उसकी और उसके संकटग्रस्त माता-पिता की तलाश अच्छा-सा लड़का और ठीक-ठाक घर ढूँढ़ने से आगे नहीं जा पाती। यह तलाश एक अथक और जानलेवा प्रयत्न बन जाती है और बार-बार असफल होने पर एक ऐसी प्रतीक्षा का रूप ले लेती है, जो तरह-तरह के भय, नए-नए नुस्ख़े आज़माने, ज्योतिषियों के चक्कर लगाने और समय को भरने के दबाव पैदा करती रहती है। जब तक शादी न हो तब तक लड़की क्या करे?

‘शादी से पेशतर’ की कई लड़कियों में एक डेज़ी कहती है, ‘‘कुछ सोचो मत बस करती चली जाओ।’’ क्या करती चली जाओ? नए-नए कोर्स—ब्यूटीशियन बनने के, कम्प्यूटर विशेषज्ञ बनने के, इंटीरियर डेकोरेटर बनने के और न जाने क्या-क्या। इस करते जाने के पीछे एक धुँधला-सा संकेत अपने पैरों पर खड़े होने का भी ज़रूर रहता है, लेकिन वह शादी को ही ‘मोक्ष’ मानने के कारण ठोस रूप ग्रहण नहीं कर पाता। ‘शादी से पेशतर’ हमें एक ऐसे अन्तःपुर के एकदम भीतर ले जाता है, जिसकी विदीर्णता का हम अनुमान भी नहीं लगा पाते क्योंकि हमें जो दिखाई पड़ता है, उसी को देख रहे होते हैं। यह एक ऐसा कोलाज़नुमा लघु उपन्यास है जो सरसरी दृष्टि से पढ़ने पर सतह पर ही तैरता मालूम पड़ता है, पर ध्यान देने पर यह बताता है कि सतह सिर्फ़ सतही नहीं होती, उसमें नीचे गहराई और डूब भी रहती है।

लेखिका बिना किसी लेखकीय टिप्पणी और गुरुगम्भीरता के शादी का इन्तज़ार करती हुई लड़कियों से हमारी इस तरह मुलाक़ात करवाती है कि हम परेशानी महसूस करने लगते हैं। वह हमें लड़की देखने आए लोगों में बैठा देती है।

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Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Isbn 10 812670179X
Publication Year 2001
Edition Year 2001, Ed. 1st
Pages 144p
Price ₹200.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Author: Sharmila Bohra

शर्मिला बोहरा

जन्‍म : 7 जुलाई, 1973; दरभंगा, बिहार।

शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.ए., एम.फिल्.।

प्रमुख कृतियाँ : ‘शादी से पेशतर’ (उपन्‍यास); ‘बूढ़ा चाँद’, ‘राग-विराग और अन्‍य कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह)।

सम्‍मान : ‘युवा पुरस्‍कार’ (भारतीय भाषा परिषद), ‘कन्‍हैयालाल सेठिया सारस्‍वत सम्‍मान’, गद्य-लेखन का प्रथम पुरस्‍कार (राजश्री स्‍मृति न्‍यास)।

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