Sarabjit Singh ki Ajeeb Dastan-Paper Back

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सरबजीत के मामले में अभियोजन पक्ष के सबूत बहुत ही कमज़ोर हैं। उसका नाम एफ़आईआर में भी दर्ज नहीं था।

—न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू; पूर्व अध्यक्ष, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया, भारत के उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और फ्री सरबजीत कमेटी के अध्यक्ष

 

सीमा के दोनों ओर इस तरह के कई मामले हैं। इन मामलों का पुनर्निरीक्षण होना चाहिए और अविलम्ब कैदियों की अदला-बदली होनी चाहिए। भारत और पाकिस्तान, दोनों को ही इस तरह के कैदियों की पहचान करके उन्हें जेनेवा कन्वेंशन के प्रावधानों के आधार पर छोड़ना चाहिए।

—कमल एम. मोरारका; पूर्व केन्द्रीय मंत्री, समाजसेवी एवं फ्री सरबजीत कमेटी के सदस्य

 

दोनों देशों की सरकारें एक दूसरे के नागरिकों के साथ बन्धकों जैसा व्यवहार करती हैं, यद्यपि लोग अच्छे पड़ोसियों की तरह रहने की कामना करते हैं। लोगों को सरकारों पर दबाव बनाने के लिए आगे आना चाहिए, ताकि भारत और पाकिस्तान में कोई दूसरा सरबजीत न हो।

संतोष भारतीय; प्रधान सम्पादक, ‘चौथी दुनिया’, साप्ताहिक अख़बार

 

सरबजीत के केस की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई। यह विडम्बना है। अन्‍तरराष्ट्रीय सम्बन्धों की विचित्रता और दोषपूर्ण न्याय-प्रणाली का आपसी मेल इस व्यक्ति के दुर्भाग्य का कारण बना।

—ज़ुबैदा मुस्तफ़ा; पॉपुलेशन इंस्टीट्यूट, वाशिंगटन, अमेरिका द्वारा दिए जानेवाले ग्लोबल मीडिया अवार्ड फ़ॉर एक्सीलेंस 1986 व 2004 की विजेता

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2013
Edition Year 2013, Ed. 1st
Pages 148p
Price ₹195.00
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Awaish Sheikh

Author: Awaish Sheikh

अवैस शेख़

पाकिस्तान के मशहूर वकील, मानवाधिकारवादी और पाक-इंडिया पीस इनिशिएटिव के

प्रेसिडेंट।

पाकिस्तान में भारतीय क़ैदी सरबजीत सिंह के चर्चित केस की वकालत की।

प्रमुख कृतियाँ : ‘समझौता एक्सप्रेस’, ‘सरबजीत सिंह की अजीब दास्तान’।

निधन : 19 मार्च, 2018; स्वीडेन।

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