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Sange Sabur : Sahansheel Patthar-Hard Cover

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9788126718542
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एक फ़ारसी लोककथा के अनुसार ‘संगे सबूर’ एक जादुई काला पत्थर होता है, जो मनुष्य के दु:खों को सुनता है, अपने भीतर समाता है, और जब भर जाता है तो फट पड़ता है। अपने भीतर जमा सारे दु:खों को वापस दुनिया के ऊपर पलट देता है और यही दुनिया का अन्त होता है।

ज़िहादी हिंसा से छिन्न-भिन्न किसी शहर में एक जर्जर घर है और गोलियों की आवाज़ों से हिलती-काँपती उसकी दीवारों के भीतर एक स्त्री अपने घायल पति को छिपाए बैठी है। पति की गर्दन में गोली लगी है और इस समय वह कोमा में है। जीवन और मृत्यु के बीच की इसी अचेतनावस्था में पत्थर की तरह पड़े अपने पति को वह स्त्री-जीवन में पहली बार वह सब सुना रही है जिसे कहने की इजाज़त न उसका धर्म उसे देता है, न समाज और न ही पुरुष वर्चस्व। तहेदिल और भरपूर स्नेह के साथ पति की तीमारदारी में जुटी वह स्त्री आज अपने तमाम सपनों, वंचनाओं, पापों और ग़ुस्से को शब्द देती है, अपने रहस्यों से पर्दा उठाती है, अपने दु:खों का हिसाब माँगती है और एक लोमहर्षक कथा बुनती है।

अफ़गानी मूल के फ़्रांसीसी लेखक अतिक् रहिमी इस उपन्यास में संसार की उन असंख्य औरतों की ज़ुबान को हरकत दे रहे हैं जो सदियों से ख़ामोश हैं और जिनके पास ऐसी जाने कितनी कहानियाँ अनकही पड़ी हुई हैं जो सामने आएँ तो पत्थरों के भी कलेजे बेसाख़्ता फट पड़ें।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Editor Not Selected
Publication Year 2010
Edition Year 2010, Ed. 1st
Pages 120p
Price ₹200.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1
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Author: Atiq Rahimi

अतिक् रहिमी

अतिक् रहिमी का जन्‍म 26 फरवरी, 1962 को काबुल, अफ़ग़ानिस्‍तान में हुआ। सोवियत आक्रमण के बाद उन्‍होंने एक साल तक पाकिस्तान में शरण लिया। 1985 में राजनीतिक शरण प्राप्त होने के बाद फ़्रांस में स्थानान्‍तरित हो गए, जहाँ उन्होंने सोरबोन विश्वविद्यालय में सिनेमैटोग्राफ़ी में डॉक्टरेट प्राप्त किया। फिर वे पेरिस स्थित एक प्रोडक्शन कम्पनी से जुड़ गए और उन्होंने फ़्रांसीसी टेलीविज़न के लिए सात वृत्तचित्रों के साथ-साथ कई विज्ञापनों का निर्माण किया। रहिमी को साहित्यिक कृतियों और फ़िल्‍म-निर्माण के लिए कई पुरस्‍कार मिले, जिनमें प्रमुख हैं—‘गोनकोर्ट अवार्ड’, ‘कान्स इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल न्यूकमर अवार्ड’, ‘फ़ाउंडेशन डी फ़्रांस अवार्ड’ आदि।

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