Sahar Ke Khwab

Ghazal,Urdu Poetry
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Sahar Ke Khwab
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प्रेम की गहरी व्यंजना, नज़दीकियों और दूरियों की हस्सास अक्कासी, देश और समाज की तल्ख़ हक़ीक़तों से ज़ख़्मी मिसरों और शे’रों की गहरी बुनावट—इन सबसे मिलकर बनती हैं मो‌निका सिंह की ग़ज़लें और इस नए ग़ज़ल-संग्रह के ख़्वाब।

कहते हैं सहर यानी सुबह के वक़्त देखे गए ख़्वाब सच हो जाते हैं। इस संग्रह की ग़ज़लों में ऐसे अनेक ख़्वाब सँजोए गए हैं, जिन्हें सच होना ही चाहिए। ख़ुशियों के, प्यार के, मिलन के, समाजी एकता और क़ौमी मुहब्बत के ख़्वाब के साथ मोनिका सिंह अपने वक़्त को भी बहुत गहराई से देखती है; और अपने मन को भी। यही वजह है कि उनके अहसास का सन्तुलन कहीं भी गड़बड़ाता नहीं है।

‘यकायक नींद में आँसू निकल आए; वो ख़्वाबों में मुझे तड़पा गया शायद।’ एक ग़ज़ल का यह शे’र जहाँ इश्क़ की गहरी संवेदना को रौशन करता है, वहीं हमें ऐसे शे’र भी पढ़ने को मिलते हैं: ‘दूरियाँ दो मज़हबों में की जिन्होंने, कह रहे वो/फ़ासले होते नहीं कम, बात इतनी सी नहीं है/ फेंककर स्याही बने हैं देशभक्ति के पुजारी/बँट गए मुद्दों में यूँ हम, बात इतनी सी नहीं है।’

देवनागरी लिपि में लिखी जानेवाली ग़ज़लों ने धीरे-धीरे उर्दू अल्फ़ाज़ से अपनी नज़दीकी बढ़ाई है, आमफ़हम होने के नाम पर सपाट होने की आशंका को उसने काफ़ी कम किया है, और उर्दू ग़ज़ल की बहुस्तरीय अर्थगर्भिता के नज़दीक गई है। यह बात इस संग्रह में भी देखने को मिलती है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2020
Edition Year 2020, Ed. 1st
Pages 134p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2
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Editorial Review

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Monika Singh

Author: Monika Singh

मोनिका सिंह

जन्म : 11 सितम्बर, 1974

शिक्षा : उर्दू साहित्य व इतिहास से एम.ए., एलएलबी।

प्रकाशन : ‘लम्स’ (ग़ज़ल-संग्रह)।

देश-विदेश के विभिन्न मुशायरों में शिरकत एवं ग़ज़ल-पाठ।

सम्मान : महाराष्ट्र राज्य के उर्दू साहित्य अकादेमी का ‘उर्दू दोस्त सम्मान’, ‘परवीन शाकिर अवार्ड’, ‘सुपर वुमन अवार्ड’, ‘लिटरेरी एक्सीलेंस अवार्ड’ आदि।

सम्प्रति : डिप्टी कलेक्टर, पुणे, महाराष्ट्र।

ई-मेल : monikaasingh119@gmail.com

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