प्रस्तुत संस्करण की उपयोगिता में बढ़ोतरी हेतु ‘सार्वजनिक अर्थशास्‍त्र’ को पूर्णतया
परिशोधित किया गया है। आर्थिक सुधारों के वर्तमान दौर में राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में जो
एक नए आर्थिक परिवेश का निर्माण हो रहा है, उनको ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक अर्थशास्त्र के
सिद्धान्तों एवं विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया गया है। साथ
ही पुस्तक को अधिकाधिक उपयोगी बनाने हेतु यह प्रयास किया गया है कि भारतीय लोक वित्त के अति
जटिल किन्तु महत्त्वपूर्ण आयामों का विश्लेषणात्मक अध्ययन अति रुचिकर होने के साथ-साथ सभी
पाठकवर्गों के लिए तर्काधार विचार संरचना करने में सहायक हो। आशा है, यह संस्करण पाठकों को सर्वथा
नवीनता लिए हुए प्रतीत होगा एवं वे वर्तमान संस्करण को पहले से कहीं अधिक अद्यतन, व्यापक, उपयोगी
और रोचक पाएँगे।

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2006
Edition Year 2006, Ed. 1st
Pages 446p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 24.5 X 19 X 3.5
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V.C. Sinha

Author: V.C. Sinha

डॉ. वी.सी. सिन्हा

जन्म : 1940; ज़िला—सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश।

शिक्षा : इलाहबाद विश्वविद्यालय से एम.कॉम. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में, एम.ए. अर्थशास्त्र की परीक्षा विक्रम विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की जिसमें प्रथम श्रेणी में प्रथम रहे। पीएच.डी. और डी.लिट्. की डिग्रि‍याँ आपने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा से प्राप्त कीं।

अध्यापन का लगभग 40 वर्षों का अनुभव। प्रारम्‍भ में लगभग 16 वर्षों तक मध्य प्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में वाणिज्य व अर्थशास्त्र विषयों के अध्यापन का कार्य किया। इसके पश्चात् अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में व्यावसायिक अर्थशास्त्र एवं व्यावसायिक प्रबन्धन विभाग के विभागाध्यक्ष तथा विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यरत रहे। लगभग 50 रिसर्च पेपर राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। अर्थशास्त्र एवं वाणिज्य विषयों की 30 पुस्तकों का लेखन कार्य। ‘समष्टिगत अर्थशास्त्र’, ‘औद्योगिक अर्थशास्त्र’ तथा ‘अन्‍तरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र’ पुस्तकों का मराठी में भी अनुवाद किया है। बेनहम की पुस्तक ‘अर्थशास्त्र’ का हिन्‍दी में अनुवाद भी किया है। सम्प्रति डॉ. सिन्हा शोध-निदेशन व लेखन-कार्य के अतिरिक्त श्री रामकृष्ण सेवा संस्थान, रीवा के अध्यक्ष हैं जिसके माध्यम से सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।

 

 

 

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